सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को दी अंतरिम जमानत, क्या जेल से बाहर आएंगे दिल्ली सीएम?

अरविंद केजरीवाल को दिल्ली शराब घोटाला मामले में राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से उनकी गिरफ्तारी के मामले में अंतरिम जमानत दी है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मामला बड़ी बेंच को सौंप दिया है. वहीं केजरीवाल अभी जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे क्योंकि उनको सीबीआई ने भी गिरफ्तार किया है

Jul 12, 2024 - 23:34
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सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को दी अंतरिम जमानत, क्या जेल से बाहर आएंगे दिल्ली सीएम?

केजरीवाल को अंतरिम जमानत

21 मार्च को अरेस्ट हुए थे सीएम

अरविंद केजरीवाल को दिल्ली शराब घोटाला मामले में राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से उनकी गिरफ्तारी के मामले में अंतरिम जमानत दी है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मामला बड़ी बेंच को सौंप दिया है. वहीं केजरीवाल अभी जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे क्योंकि उनको सीबीआई ने भी गिरफ्तार किया है. 

90 दिनों से ज्यादा वक्त जेल में गुजारा'

शीर्ष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका को बड़ी पीठ के पास भेज दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने ईडी के मामले में केजरीवाल को अंतरिम जमानत देते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल को 90 दिनों से ज्यादा वक्त जेल में गुजारा है. केजरीवाल निर्वाचित नेता हैं और यह उन्हें तय करना है कि क्या वह दिल्ली के मुख्यमंत्री बने रहना चाहते हैं.

AAP की ओर से आई ये प्रतिक्रिया

वहीं उच्चतम न्यायालय ने अरविंद केजरीवाल की याचिका पर ईडी की गिरफ्तारी की शक्तियों से संबंधित तीन सवाल उठाए. उधर ईडी की ओर से दायर आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत मिलने पर पार्टी ने कहा, सत्यमेव जयते.

21 मार्च को गिरफ्तार हुए थे केजरीवाल

बता दें कि केजरीवाल को ईडी ने धनशोधन मामले में 21 मार्च को गिरफ्तार किया था. उन्हें एक निचली अदालत ने एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर मामले में 20 जून को जमानत दी थी. हालांकि, ईडी ने अगले दिन दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया था और दलील दी थी कि केजरीवाल को जमानत देने का निचली अदालत का आदेश एकतरफा और गलत था. 

केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट के नौ अप्रैल के आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने मामले में केजरीवाल की गिरफ्तारी को बरकरार रखते हुए कहा था कि इसमें कोई अवैधता नहीं है और जांच में उनके शामिल होने से बार-बार इनकार करने के बाद ईडी के पास कोई विकल्प नहीं बचा था.

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