क्यों गणतंत्र दिवस पर बुलाए जाते हैं इंटरनेशनल चीफ गेस्ट, किन नियमों के तहत होता है चुनाव

26 जनवरी, 2025 को 76वें गणतंत्र दिवस के मौके पर इस साल इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियातो भारत आने वाले हैं. हालांकि, क्या आपने कभी सोचा है कि क्यों हर साल कोई इंटरनेशनल चीफ गेस्ट आमंत्रित किए जाते हैं.

Jan 23, 2025 - 19:44
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क्यों गणतंत्र दिवस पर बुलाए जाते हैं इंटरनेशनल चीफ गेस्ट, किन नियमों के तहत होता है चुनाव

गणतंत्र दिवस पर आते हैं चीफ गेस्ट

राष्ट्रपति द्वारा दिया जाता है सम्मान

 भारत 26 जनवरी, 2025 को अपना 76वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है. हर साल 26 जनवरी का दिन किसी भी भारतीय के लिए बेहद अहम होता है. स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी दफ्तरों में राष्ट्रीय ध्वज लहराकर यह दिन मनाया जाता है. पूरा देशभक्ति के रंग में डूबा नजर आता है. वहीं, गणतंत्र दिवस के मौके पर सालों से इंटरनेशनल चीफ गेस्ट बुलाने की भी परंपरा चली आ रही है. इस साल चीफ गेस्ट के तौर पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियातो गणतंत्र दिवस के होने पर शामिल होने वाले हैं.

1950 से चलती आ रही है परंपरा

प्रबोवो सुबियांतो 25 और 26 जनवरी को भारत में रहेंगे. उनसे पहले 2024 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों गणतंत्र दिवस का हिस्सा बने थे, जबकि 2023 में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी को भारत बुलाया गया था. हालांकि, इन सबके बीच क्या आप जानते हैं कि भारत सरकार क्यों और किन नियमों के तहत हर साल इंटरनेशनल चीफ गेस्ट का चयन करती है? चलिए आज इसी सवाल का जवाब जानने की कोशिश करते हैं. बता दें कि गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बुलाने की ये परंपरा 1950 से चलती आ रही है.

क्यों बुलाए जाते हैं इंटरनेशनल चीफ गेस्ट

अब सवाल ये उठता है कि आखिर अपने देश के गणतंत्र दिवस पर दूसरे देश के राष्ट्रपति को क्यों आमंत्रित किया जाता है. दरअसल, ऐसा दूसरे देशों के साथ अपने रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए किया जाता है, साथ ही भारत का महत्व दुनिया के बाकी देशों के बीच बढ़ता है. ऐसे में भारत के अन्य देशों के साथ कूटनीतिक संबंध मजबूत बनाने के लिए गणतंत्र दिवस ही सबसे बेहतर दिन माना गया और शुरू हो गई चीफ गेस्ट बुलाने की परंपरा.

कैसे किया जाता है चयन

गणतंत्र दिवस पर किस चीफ गेस्ट को बुलाया जाएगा इसका चयन करने की प्रक्रिया में 6 माह पहले ही संबंधित अधिकारी जुट जाते हैं. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के एम्बेसडर रह चुके मानबीर सिंह का कहना है कि चीफ गेस्ट चुनते वक्त कई बातों का ध्यान रखा जाता है. जैसे- उस देश के भारत के साथ संबंध कैसे हैं, या वहां की आर्मी, इकोनॉमी और राजनीतिक कनेक्शन भारत के साथ कैसे हैं. इस तरह की कई चीजों पर गंभीरता से विचार-विमर्श करने के बाद किसी एक विदेशी मेहमान का नाम तय किया जाता है. रिपोर्ट्स की मानें तो इस चीफ गेस्ट पर आखिरी मुहर विदेश मंत्रालय की ही लगती है.

भारत के राष्ट्रपति देते हैं सम्मान 

गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस पर भारत आने वाले चीफ गेस्ट को सेरेमनी के दौरान सर्वोच्च सम्मान से नवाजा जाता है. इतना ही नहीं, उन्हें 'गार्ड ऑफ ऑनर' भी दिया जाता है. इसके बाद शाम को भारत के राष्ट्रपति की ओर से चीफ गेस्ट के सम्मान में एक स्पेशल रिसेप्शन पार्टी का भी आयोजन किया जाता है.

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