तिरंगे पर सियासत: वक़्फ़ बोर्ड के आदेश से नाराज़ शहर काजी, बोले-देशभक्ति पर सवाल क्यों?
छत्तीसगढ़ वक़्फ़ बोर्ड की ओर से मस्जिदों और मदरसों में तिरंगा फहराने के आदेश के बाद राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं हैं. दरअसल, वक़्फ़ बोर्ड चेयरमैन डॉ. सलीम राज के बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया. उनके बयान पर कांग्रेस की ओर से भी प्रतिक्रिया आई और इसे दुर्भाग्यजनक बताया गया.
देशभर में गणतंत्र दिवस की तैयारियां जोरों पर हैं. इस बीच छत्तीसगढ़ (Chhttisgarh) में मस्जिदों और मदरसों में तिरंगा फहराने को लेकर वक़्फ़ बोर्ड के आदेश के बाद सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है. जहां एक ओर इसे राष्ट्रीय पर्व को सम्मान देने की पहल बताया जा रहा है. वहीं, दूसरी ओर इस आदेश के तरीके और बयानबाज़ी को लेकर विरोध के सुर भी उबरने लगे हैं.
वक़्फ़ बोर्ड के आदेश के बाद बढ़ी सियासत
छत्तीसगढ़ वक़्फ़ बोर्ड की ओर से मस्जिदों और मदरसों में तिरंगा फहराने के आदेश के बाद राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं हैं. दरअसल, वक़्फ़ बोर्ड चेयरमैन डॉ. सलीम राज के बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया. उनके बयान पर कांग्रेस की ओर से भी प्रतिक्रिया आई और इसे दुर्भाग्यजनक बताया गया.
देशभक्ति पर संदेह खड़ा किया जा रहा है”
रायपुर के शहर काजी अशरफ़ मियां ने वक़्फ़ बोर्ड के आदेश और उससे जुड़े बयानों पर नाराज़गी जताई है. उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज की देशभक्ति पर सवाल उठाना उचित नहीं है. उनके अनुसार मस्जिदों और मदरसों में पहले भी तिरंगा फहराया जाता रहा है और आगे भी फहराया जाएगा, लेकिन जिस तरह आदेश जारी किया गया है, उसे वे नहीं मानते. शहर काजी का कहना है कि तिरंगे का सम्मान सभी धर्मस्थलों में होता है और इसे आदेशों के जरिए नहीं, बल्कि स्वाभाविक भावना से किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि अगर आदेश जारी करने हैं, तो सभी धर्मस्थलों के लिए समान रूप से जारी किए जाएं. उन्होंने आगे कहा कि वक्फ बोर्ड का काम सिर्फ वक्त की संपत्ति का रखरखाव और उससे होने वाली आय से समाज की बेहतरी के लिए काम करना है. हालांकि, छत्तीसगढ़ में वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज की ओर से समय-समय पर ऐसे बयान जारी किए जाते रहते हैं, जो उनके अधिकार क्षेत्र में ही नहीं आता है.
“बयान दुर्भाग्यजनक और विभाजनकारी”
वक्फ बोर्ड चेयरमैन के बयान पर कांग्रेस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई. कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस तरह के बयान समाज में भ्रम और तनाव पैदा करते हैं. उनका कहना है कि किसी भी समुदाय की देशभक्ति पर सवाल उठाना ठीक नहीं है, खासकर जब बात राष्ट्रीय पर्व जैसे अवसर की हो.
मंदिरों में भी फहराया जाता है तिरंगा
NDTV ने इस मुद्दे पर मंदिरों में तिरंगा फहराने की व्यवस्था को लेकर जानकारी ली. कालीबाड़ी मंदिर समिति और सुरेश्वर महादेव मंदिर के प्रतिनिधियों ने बताया कि 26 जनवरी और 15 अगस्त को मंदिरों में नियमित रूप से तिरंगा फहराया जाता है और यह वर्षों से चली आ रही परंपरा है. उनका कहना है कि राष्ट्रीय पर्व सभी धर्मों और समुदायों को जोड़ने का अवसर होते हैं, न कि विवाद का.
गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व को पूरे उत्साह और सम्मान के साथ मनाना हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है. देश की एकता और अखंडता बनाए रखने के लिए यह ज़रूरी है कि तिरंगे जैसे प्रतीकों को राजनीति से दूर रखा जाए. किसी की देशभक्ति का प्रमाण मांगने के बजाय, राष्ट्रीय पर्व को साझा उत्सव के रूप में मनाया जाना चाहिए—यही लोकतंत्र की असली भावना है.
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