बिजली विभाग और नगर परिषद के बीच जंग! बिल मांगने पर नाराज परिषद ने ऑफिस गेट पर डाला कचरा

सागर जिले के शाहगढ़ में बिजली बिल को लेकर नगर परिषद और विद्युत विभाग आमने‑सामने आ गए. 9.61 लाख रुपये के बकाया बिल को लेकर नाराज नगर परिषद ने विद्युत विभाग के कार्यालय गेट पर कचरा डलवा दिया.

Mar 31, 2026 - 17:54
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बिजली विभाग और नगर परिषद के बीच जंग! बिल मांगने पर नाराज परिषद ने ऑफिस गेट पर डाला कचरा

सागर जिले के शाहगढ़ में मंगलवार को उस समय अजीब हालात बन गए, जब बिजली बिल को लेकर नाराज नगर परिषद ने विद्युत विभाग के दफ्तर के सामने कचरा डलवा दिया. आमतौर पर कागजी नोटिस और विभागीय बैठकों के जरिए सुलझने वाला विवाद इस बार सरेआम सड़कों पर दिखा, जिससे प्रशासनिक सिस्टम पर भी सवाल खड़े हो गए.

बकाया बिजली बिल से शुरू हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार, नगर परिषद शाहगढ़ पर विद्युत विभाग का करीब 9 लाख 61 हजार रुपए का बिजली बिल बकाया है. विद्युत विभाग ने इस राशि को लेकर पहले भी कई बार नगर परिषद को पत्र भेजे थे, लेकिन भुगतान नहीं हुआ. बकाया लगातार बढ़ने के बाद विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए स्ट्रीट लाइट बंद कर दी थी.

गेट के सामने डलवाया कचरा

स्ट्रीट लाइट बंद होने से नाराज नगर परिषद ने मंगलवार सुबह अलग ही तरीका अपनाया. परिषद के निर्देश पर विद्युत विभाग के गेट के सामने तीन ट्राली कचरा डलवा दिया गया. अचानक हुई इस घटना से न सिर्फ विभाग के कर्मचारी हैरान रह गए, बल्कि आसपास के इलाकों में भी हड़कंप मच गया.

सीएमओ के निर्देश पर कार्रवाई का आरोप

सूत्रों के मुताबिक, यह पूरी कार्रवाई नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) विनय मिश्रा के कहने पर की गई. हालांकि इसको लेकर नगर परिषद की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन घटना के बाद दोनों विभागों के बीच तनाव खुलकर दिखने लगा.

घटना की सूचना मिलते ही तहसीलदार जीसी राय, विद्युत विभाग के कनिष्ठ अभियंता रवि सोलंकी सहित अन्य अधिकारी और कुछ पार्षद मौके पर पहुंचे. काफी देर तक हालात को संभालने और आपसी बातचीत के जरिए मामला शांत करने की कोशिश की जाती रही.

विद्युत विभाग ने लगाए गंभीर आरोप

कनिष्ठ अभियंता रवि सोलंकी ने बताया कि फरवरी महीने में नगर परिषद को बकाया बिजली बिल और अवैध रूप से चल रही मोटरों को लेकर पत्र जारी किया गया था. इसके बावजूद परिषद की ओर से न तो लिखित जवाब दिया गया और न ही भुगतान किया गया. उनका कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम व्यक्तिगत द्वेष के चलते किया गया है.

प्रशासनिक समन्वय पर उठे सवाल

इस पूरी घटना के बाद स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक कार्यप्रणाली और विभागों के बीच तालमेल को लेकर सवाल उठने लगे हैं. जानकारों का कहना है कि सरकारी विभागों के बीच इस तरह के टकराव से आम जनता का भरोसा कमजोर होता है और समस्याएं सुलझने के बजाय और बढ़ जाती हैं.

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