Income Tax | अगर धारा 143(2) के तहत नोटिस जारी नहीं किया गया तो पुनर्मूल्यांकन कार्यवाही नहीं की जा सकती: सुप्रीम कोर्ट

Oct 29, 2026 - 16:28
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Income Tax | अगर धारा 143(2) के तहत नोटिस जारी नहीं किया गया तो पुनर्मूल्यांकन कार्यवाही नहीं की जा सकती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर आयकर विभाग (Revenue) किसी करदाता को आयकर अधिनियम की धारा 143(2) के तहत नोटिस नहीं भेजता है, तो पुनर्मूल्यांकन की पूरी कार्यवाही अमान्य हो जाएगी। कोर्ट ने कहा, "अधिनियम की धारा 143(2) के तहत नोटिस देना अनिवार्य है, क्योंकि यह करदाता को ऐसे सबूत या जानकारी पेश करने का मौका देता है, जिसके आधार पर वह राहत का दावा कर रहा है। धारा 147 के तहत पुनर्मूल्यांकन की कार्यवाही शुरू करने के लिए धारा 143(2) का नोटिस होना एक अनिवार्य शर्त है। अगर धारा 143(2) के तहत नोटिस नहीं दिया गया तो आयकर विभाग आगे कोई कार्यवाही नहीं कर सकता।"

जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने उड़ीसा हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ आयकर विभाग की अपील खारिज की। हाईकोर्ट ने करदाताओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा था कि चूंकि आयकर विभाग ने धारा 143(2) के तहत अनिवार्य नोटिस जारी नहीं किया, इसलिए उनके खिलाफ की गई पुनर्मूल्यांकन की कार्यवाही अमान्य है। इसके अलावा, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर धारा 143(2) के तहत कोई औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया गया तो केवल करदाता का पुनर्मूल्यांकन कार्यवाही में शामिल हो जाना, धारा 143(2) और धारा 292BB का अनुपालन नहीं माना जाएगा।

धारा 143(2) के तहत नोटिस इसलिए जारी किया जाता है ताकि करदाता उन सबूतों को पेश कर सके, जिनके आधार पर वह अपने 'रिटर्न ऑफ इनकम' (आय विवरण) के समर्थन में दावा कर रहा है। धारा 292BB, मूल्यांकन और पुनर्मूल्यांकन की कार्यवाही में नोटिस की 'मान ली गई तामील' (Deemed Service) से संबंधित है। इसमें कहा गया कि अगर कोई करदाता किसी मूल्यांकन या पुनर्मूल्यांकन कार्यवाही में पेश होता है या किसी जांच में सहयोग करता है, तो कानूनी रूप से यह मान लिया जाएगा कि अधिनियम के तहत जरूरी नोटिस उसे सही समय पर मिल गया।

राजस्व विभाग ने धारा 292BB का हवाला देते हुए तर्क दिया कि धारा 143(2) के तहत औपचारिक नोटिस जारी न करने मात्र से पुनर्मूल्यांकन (Reassessment) की कार्यवाही अमान्य नहीं हो जाएगी, क्योंकि करदाताओं ने कार्यवाही में हिस्सा लिया। इस तर्क को खारिज करते हुए जस्टिस सचदेवा द्वारा लिखे गए फैसले में कहा गया कि धारा 292BB के तहत 'डीमिंग फिक्शन' (कानूनी कल्पना) केवल तब लागू होती है जब करदाता को कोई नोटिस जारी किया गया हो। इसका उद्देश्य यह है कि करदाता बाद में यह दावा न कर सके कि उसे कोई नोटिस नहीं मिला, या नोटिस समय पर नहीं मिला, या नोटिस की तामील (Service) सही तरीके से नहीं हुई।

धारा 292BB के तहत यह 'डीमिंग फिक्शन' राजस्व विभाग के तब काम आती है, जब करदाता नोटिस मिलने के बाद कार्यवाही में शामिल तो होता है, लेकिन वह खुद नोटिस जारी किए जाने पर ही सवाल उठाता है। हालाँकि, जब कोई नोटिस जारी ही न किया गया हो — जैसा कि इस मामले में हुआ है — तो यह प्रावधान लागू नहीं होगा। अदालत ने कहा, "यह 'डीमिंग फिक्शन' वहां लागू नहीं हो सकती, जहां राजस्व विभाग ने खुद स्वीकार किया है कि उसने कोई नोटिस जारी ही नहीं किया था। जब राजस्व विभाग का ही यह कहना है कि कानून के अनुसार जरूरी नोटिस भेजा ही नहीं गया तो धारा 292BB का प्रावधान लागू नहीं होगा।" निम्नलिखित निष्कर्ष निकाले गए: "(i) अधिनियम की धारा 292BB, किसी करदाता (Assessee) को अधिनियम के तहत किसी भी कार्यवाही में, धारा 143(2) के अंतर्गत नोटिस जारी न किए जाने के संबंध में आपत्ति उठाने से नहीं रोकती है। भले ही करदाता ने पुनर्मूल्यांकन (Reassessment) कार्यवाही के दौरान उपस्थित होकर सहयोग किया हो और उस समय नोटिस न मिलने को लेकर कोई आपत्ति न जताई हो। (ii) यदि करदाता यह अनुरोध भी करता है कि अधिनियम की धारा 139 के तहत पहले दाखिल किए गए 'आय रिटर्न' (Return of Income) को ही, धारा 148 के तहत जारी नोटिस के जवाब में दाखिल किया गया रिटर्न मान लिया जाए तो भी राजस्व विभाग (Revenue) धारा 143(2) के तहत नोटिस भेजने की अपनी अनिवार्यता से मुक्त नहीं हो जाता है। (iii) पुनर्मूल्यांकन कार्यवाही के दौरान, असेसिंग ऑफिसर (Assessing Officer) द्वारा धारा 142(1) के तहत केवल एक पत्र जारी करना—जिसमें करदाता से उन आधारों को स्पष्ट करने के लिए कहा गया हो, जिन पर आय का पुनर्मूल्यांकन प्रस्तावित किया गया था—धारा 143(2) के तहत नोटिस भेजने की अनिवार्य कानूनी बाध्यता का पर्याप्त अनुपालन नहीं माना जाएगा।" परिणामस्वरूप, अपील खारिज की गई।

Case Title : PRINCIPAL COMMISSIONER OF INCOME TAX, BHUBANESHWAR VERSUS ORISSA MINING CORPORATION LTD. (with connected matters)

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