UP में लगा INDIA गठबंधन को तगड़ा झटका; कांग्रेस और सपा की भी नहीं बनी बात! जानें- क्यों हुए रास्ते अलग?
आगामी लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत में परेशानी का सामना करने के बाद गठबंधन टूट गया है.
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस-समाजवादी पार्टी का गठबंधन टूटा
मुरादाबाद सीट पर असहमति के कारण रुकी बातचीत
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (SP) के बीच महत्वपूर्ण गठबंधन टूट गया है. मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि दोनों पार्टियों में जल्द सीट बंटवारे को लेकर फैसला फाइनल होने वाला था, लेकिन सोमवार देर रात हुई बातचीत में मुख्य रूप से मुरादाबाद मंडल में तीन महत्वपूर्ण सीटों के आवंटन पर दोनों पार्टियों के बीच असहमति बनी रही, जिस कारण गठबंधन के टूटने की खबर आई.
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने यह स्पष्ट कर दिया था कि उनकी पार्टी राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा में तब तक भाग नहीं लेगी जब तक कि कांग्रेस के साथ सीट-बंटवारे के समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया जाता. लेकिन अब दोनों में कोई गठबंधन नहीं हुआ है तो ऐसे में वे राहुल गांधी की यात्रा में शामिल भी नहीं होंगे और इस कारण प्रमुख पार्टियों के बीच यूपी में INDIA गठबंधन को बड़ा झटका लगा है.
बताया गया कि लंबी चर्चाओं और अधिकांश सीटों पर आम सहमति बन गई थी, लेकिन दोनों पक्षों के गठबंधन की स्पष्ट इच्छा के बावजूद, बातचीत में मुरादाबाद की सीटों पर परेशानी खड़ी हो गई और फिर जिसपर कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं था.
कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी से बिजनोर सीट भी मांगी थी, लेकिन सपा मोरादाबाद या बिजनोर सीट देने को तैयार नहीं थी, जिससे गतिरोध पैदा हो गया और अंततः संभावित गठबंधन पटरी से उतर गया.
सपा ने दी थी कांग्रेस को 17 सीटें
अखिलेश यादव की पार्टी ने सोमवार को विवादास्पद सीटों को छोड़कर, कांग्रेस को 17 लोकसभा सीटों की अंतिम पेशकश की थी. इससे पहले सबसे पुरानी पार्टी को 11 सीटों की पेशकश की थी, लेकिन कुल मिलाकर कांग्रेस ने प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया.
सूत्रों ने बताया कि जिन सीटों पर सहमति बनी है उनमें अमेठी, रायबरेली, वाराणसी, प्रयागराज, देवरिया, बांसगांव, महाराजगंज, बाराबंकी, कानपुर, झांसी, मथुरा, फतेहपुर सीकरी, गाजियाबाद, बुलंदशहर, हाथरस, सहारनपुर जैसे हाई-प्रोफाइल निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं.
हालांकि, बलिया, मुरादाबाद और बिजनौर सीटें नहीं दी जा रही थी, जिस कारण गठबंधन परेशानी में पड़ गया. यह इंडिया ब्लॉक के लिए एक और झटका होगा, जो आगामी लोकसभा चुनावों में सत्तारूढ़ भाजपा को चुनौती देने के लिए विपक्षी दलों को एक मोर्चे में एकजुट करने के मकसद से बनाया गया है.
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