तब 41 थे, इस बार केवल 6 बचे! उनसे मिलिए जो काशी में पीएम मोदी को दे रहे चुनौती
वाराणसी लोकसभा सीट पर सबकी नजरें हैं. दो बार से पीएम मोदी रिकॉर्ड वोटों से जीत रहे हैं. इस कारण 2014 में चुनौती देने वाले उम्मीदवारों की संख्या 41 से घटकर इस बार 6 पर आ गई है. कुछ लोगों के पर्चे खारिज हुए और कई लोगों ने लड़ने का प्लान कैंसल कर दिया
जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव में काउंटिंग की तारीख करीब आती जा रही है, देशभर में रिजल्ट की चर्चा तेज होती जा रही है. वैसे अभी आखिरी चरण की वोटिंग 1 जून को होनी बाकी है. इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीट वाराणसी में भी चुनाव है. ऐसे में वहां सियासी सरगर्मी बढ़ना स्वाभाविक है. भाजपा ने अपने मुख्यमंत्रियों, नेताओं और मंत्रियों की फौज उतार दी है. घर-घर अभियान चलाए जा रहे हैं. इस चुनावी माहौल में यह समझना दिलचस्प है कि पीएम को चुनौती देने वाले कितने और कौन लोग हैं.
इस बार पहले जैसी रेस नहीं
जी हां, जिस तरह से पिछले दो चुनावों में प्रधानमंत्री ने रिकॉर्ड वोटों के अंतर से जीत हासिल की, शायद यही वजह है कि इस बार प्रत्याशियों की होड़ नहीं है. 2014 में वाराणसी से मोदी के खिलाफ 41 कैंडिडेट मैदान में थे. पिछली बार 2019 में कुल 26 कैंडिडेट पीएम को चुनौती दे रहे थे लेकिन यह आंकड़ा सिमटकर छह पर आ गया है. वैसे कई लोगों के पर्चे भी खारिज हुए.
पीएम तीसरी बार वाराणसी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. भाजपा की पूरी कोशिश है कि इस बार वोटों का मार्जिन 5 लाख से ऊपर जाए. हालांकि कांग्रेस और सपा के गठबंधन ने भी अजय राय के लिए पूरी ताकत लगा दी है. कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय समेत रेस में केवल 6 उम्मीदवार ही हैं.
2014 वाराणसी लोकसभा चुनाव
तब पीएम मोदी पहली बार वाराणसी से चुनाव लड़ने आए थे. उन्हें 56.37 प्रतिशत वोट मिले थे और वह 3.72 लाख वोटों से जीते थे. दूसरे नंबर पर आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल रहे थे. 2014 में मोदी के खिलाफ उतरे 41 उम्मीदवारों में से 19 निर्दलीय थे.
2019 वाराणसी लोकसभा चुनाव
पिछले लोकसभा चुनाव में पीएम दोबारा यहां से चुनाव जीते. पीएम की जीत का अंतर बढ़कर 4.59 लाख हो गया. उनका वोट शेयर 63.6 प्रतिशत रहा. दूसरे नंबर पर सपा कैंडिडेट शालिनी यादव थीं. पीएम के खिलाफ उतरे 26 कैंडिडेट्स में 8 निर्दलीय थे.
2024 के छह उम्मीदवारों से मिलिए
1. अजय राय (53 साल) कांग्रेस - INDIA गठबंधन
- इनके खिलाफ 18 केस चल रहे हैं. क्षेत्र के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं. अच्छी छवि है. कांग्रेस के सिंबल पर INDIA गठबंधन से चुनाव लड़ रहे हैं. वह 2009, 2014 और 2019 के चुनाव भी लड़े और वाराणसी से बड़े अंतर से हारे. फिर भी इस बार उन्हें पीएम के खिलाफ प्रमुख उम्मीदवार माना जा रहा है. पिछले दो चुनाव उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर लड़ा जबकि 2009 में वह सपा से मैदान में उतरे थे. हर बार वह तीसरे स्थान पर ही रहे.
2. अतहर जमाल लारी (70) बसपा
- इनके खिलाफ 1 केस है. वाराणसी के ही रहने वाले हैं और लूम ओनर हैं. अतहर वाराणसी से कई चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन जीत कभी नहीं मिली. गोरखपुर के डीएवी इंटर कॉलेज में 1971 में उन्होंने छात्र नेता के तौर पर यूनियन इलेक्शन लड़ा. इमर्जेंसी के दौरान उन्हें अंडरग्राउंड रहना पड़ा. 1977 में वह जनता पार्टी में शामिल हो गए थे. 1984 में उन्होंने पहली बार वाराणसी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था. 1991 में वह वाराणसी कैंट विधानसभा सीट से जनता दल के टिकट पर लड़े लेकिन दूसरे स्थान पर रहे. 1995 में अपना दल में चले गए और उन्हें स्टेट इंचार्ज बनाया गया. 2004 में वाराणसी से लड़े लेकिन तीसरे स्थान पर रहे. कौमी एकता दल से 2012 में विधानसभा चुनाव लड़े लेकिन हार गए.
3. के. शिव कुमार (46), युग तुलसी पार्टी
- हैदराबाद के रहने वाले हैं और आंध्र प्रदेश में स्थित तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर ट्रस्ट में बोर्ड मेंबर रहे हैं. उन्होंने गोरक्षा के लिए काफी काम किया है. बताते हैं कि हैदराबाद में तीन गोशालाओं में वह 1500 से ज्यादा गायों की सेवा करते हैं. वह कहते हैं कि वाराणसी के चुनाव में उनकी सबसे बड़ी मांग है कि गाय को भारत का राष्ट्रीय पशु घोषित करना चाहिए. वह कहते हैं कि भाजपा सनातन धर्म की बात तो करती है लेकिन इस कानून को लागू नहीं कर रही है
- 4. गगन प्रकाश यादव (39), अपना दल (कमेरावादी)
- इनके खिलाफ 5 केस चल रहे हैं. यह विधायक पल्लवी पटेल की पार्टी से मैदान में हैं जिन्होंने सपा के साथ अपने रास्ते अलग कर लिए. यादव को अपना चुनाव प्रचार बीच में रोकना पड़ा क्योंकि कुछ दिन पहले सड़क हादसे में उनके भाई की मौत हो गई. वह वाराणसी शहर से 4 किमी दूर भट्ठी गांव के रहने वाले हैं. वह विद्यार्थियों और किसानों की लड़ाई लड़ते रहे हैं.
5. दिनेश कुमार यादव (39), निर्दलीय
- दिनेश कुमार पिछले 15 साल से राजनीति में हैं. नामांकन दाखिल करने से पहले तक वह भाजपा के साथ बताए जा रहे थे. यादव कहते हैं कि वह चुनाव लड़ रहे हैं क्योंकि देश में लोकतंत्र है.
6. संजय कुमार तिवारी (49), निर्दलीय
- संजय नई दिल्ली के सोशल वर्कर हैं. उन्होंने दावा किया है कि वह कामगारों के हित में कई अभियानों में शामिल रहे हैं. वह गांधी दर्शन से प्रभावित हैं.
- साभार