पंजाब में एकला चलो रे... मीटिंग के अगले ही दिन केजरीवाल ने इंडिया गठबंधन को दे दिया गच्चा
एक तरफ आम आदमी पार्टी पहले ही पंजाब को लेकर अपना रुख जता चुकी है, यहां तक कि केजरीवाल वहां की रैलियों में भी यह बात कह चुके हैं. तो वहीं दूसरी तरफ गठबंधन में शामिल अन्य पार्टियां भी अब सुर बदलने लगी हैं.
इंडिया गठबंधन की बैठक जब जब होती है, उसके बाद कुछ ना कुछ ऐसा होता है कि विपक्षी दलों का रायता सिमटने की बजाय फैल जाता है. इस बात भी कमोबेश वही होता दिख रहा है. मंगलवार को जब इंडिया दलों की बैठक हुई तो बताया गया कि यह तय हुआ है कि जल ही शीट शेयरिंग के मामले पर एकराय बन जाएगी. लेकिन अब ऐसा होता नहीं दिख रहा है. उसका कारण है कि पंजाब को लेकर आम आदमी पार्टी ने अपने मंसूबे लगभग साफ कर दिए हैं. आप के मुखिया अरविन्द केजरीवाल पहले ही पंजाब की रैलियों में पंजाब की जनता से पूरी 13 सीटें मांग रहे हैं तो वहीं अब राज्य में पार्टी के नेता भी यही बात दोहराने लगे हैं. इसी बीच कांग्रेस की पंजाब कमेटी के मुखिया अमरिंदर सिंह भी आर-पार के मूड में हैं. हाल ही में उन्होंने एक बयान दिया कि कांग्रेस भी सभी 13 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी. इसक मतलब यही है कि दिल्ली में एकजुट होने वाली पारितां पंजाब में एकला चलो का नारा दे रही हैं. इसी बीच
'चाय बिस्किट तक सीमित रही इंडिया की बैठक'
असल में पहले इंडिया गठबंधन की बैठक को एक बताएं से समझिए. मंगलवार को हुई इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद जदयू सांसद सुनील कुमार पिंटू का बयान सामने आया जो चौंकाने वाला है. उन्होंने कहा कि कल की बैठक में कई दलों के बड़े नेता गठबंधन में हिस्सेदारी के लिए आए थे. लेकिन इस पर कोई चर्चा नहीं हो सकी. कल की बैठक चाय बिस्किट तक ही सीमित रही. क्योंकि कांग्रेस ने हाल ही में कहा था कि उनके पास फंड की कमी है और वे 138 रुपए, 1380 रुपए या 13,800 रुपए का चंदा मांग रहे हैं. अभी तक चंदा आना बाकी है. इसलिए कल की बैठक बिना समोसे के सिर्फ चाय और बिस्कुट पर बिना किसी गंभीर मुद्दे पर चर्चा के खत्म हो गई है.
ममता का 'खड़गे दांव' और कई पस्त
अब इसको मीटिंग से कनेक्ट करिए. मीटिंग में पहुंचीं टीएमसी नेता ममता बनर्जी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को विपक्षी गठबंधन का चेहरा बनाए जाने का प्रस्ताव रखा. इस प्रस्ताव का AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत 12 पार्टियों ने समर्थन भी किया और चुनाव में दलित चेहरे के साथ जाने के फायदे भी गिना डाले. बस इससे कुछ खुश हुए तो कुछ नाराज हो गए. कहा जा रहा है. लालू और नीतीश खफा होकर संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले ही होटल से निकल गए. इसे लेकर तमाम चर्चाओं का दौर भी शुरू हो गया है. मीटिंग में 28 पार्टियों के नेता शामिल हुए जो लास्ट तक नहीं रुक पाए.
अब केजरीवाल का पंजाब दांव'
चूंकि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है. वहां पहले से ही केजरीवाल आत्मविश्वास से भरपूर हैं. अगर उन्हें इंडिया गठबंधन की इतनी ही चिंता होती तो शायद वे और उनके पार्टी के नेता खुलेआम पंजाब को लेकर ऐलान ना कर रहे होते. यही कारण है किदिल्ली में भले ही कांग्रेस और आप एक ही गठबंधन का हिस्सा हैं लेकिन पंजाब में दोनों के बीच अभी बात नहीं बन रही है. उधर नवजोत सिंह सिद्धू बार-बार इंडिया गठबंधन की दुहाई देते फिर रहे हैं लेकिन राज्य की आम आदमी सरकार पर ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं.
पंजाब में क्या है समीकरण
अब चूंकि इंडिया गठबंधन का मामला पंजाब से बिगड़ता दिख रहा है तो यहां का समीकरण समझना जरूरी है. पंजाब की कुल 13 लोकसभा सीटों में सात कांग्रेस, दो भाजपा, दो शिरोमणि अकाली दल और एक सीट शिरोमणि अकाली दल और एक आम आदमी पार्टी के पास है. इसके अलावा पंजाब से आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसद हैं. केजरीवाल वहां की जनता से लोकसभा चुनाव की सभी 13 सीटें मांग रहे हैं. अब देखना होगा कि इंडिया गठबंधन इस पर क्या प्रतिक्रिया देगा.
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