बिहार के लिए नहीं, लोकसभा की 40 सीटों की है चिंता! BJP की 'पॉलिटिकल स्ट्राइक' से INDIA ढेर?
बिहार में सत्ता परिवर्तन सुर्खियों में जरूर है.. लेकिन सियासी गलियारों में इसके लोकसभा चुनाव में पड़ने वाले असर पर चर्चा हो रही है. विपक्ष को नीतीश कुमार के राजद को छोड़ने से ज्यादा उनके इंडी गठबंधन से बाहर निकलने का गम साल रहा है.
बिहार में सत्ता परिवर्तन सुर्खियों में जरूर है.. लेकिन सियासी गलियारों में इसके लोकसभा चुनाव में पड़ने वाले असर पर चर्चा हो रही है. विपक्ष को नीतीश कुमार के राजद को छोड़ने से ज्यादा उनके इंडी गठबंधन से बाहर निकलने का गम साल रहा है. विपक्ष के सारे नेता नीतीश पर हमलावर हैं. लेकिन भाजपा ने नीतीश के कदम को सही ठहराया है. क्योंकि इस वक्त सारे सियासी दांव लोकसभा चुनाव में बाजी मारने के लिए ही चले जा रहे हैं.
बिहार ने पूरे देश को चौंकाया
बिहार के सियासी उलटफेर ने सभी को चौंका दिया है. लोकसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य में सत्ता परिवर्तन ने इंडी गठबंधन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. नीतीश के एनडीए में शामिल होने पर बिहार के नेताओं की तुलना में इंडी गठबंधन के नेताओं की प्रतिक्रिया ज्यादा आ रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि लोकसभा चुनाव के हिसाब से अभी तक इंडी गठबंधन को बिहार में मजबूत माना जा रहा था.
बिगड़ा इंडी गठबंधन का खेल
लेकिन नीतीश कुमार ने अपने कदम से इंडी गठबंधन का खेल बिगाड़ दिया है. वहीं, भाजपा ने नीतीश को अपने खेमे में खींचकर बिहार लोकसभा चुनाव में अपनी दावेदारी मजबूत कर ली है. सूत्रों के मुताबिक सीएम नीतीश कुमार ने भी कहा है कि इंडी गठबंधन में सब ठीक नहीं है. सीट बंटवारो को लेकर भी उन्होंने नाराजगी जताई थी. जिसके बाद से बिहार में सियासी उठापटक देखने को मिल रही थी.
एनडीए ने मजबूत की दावेदारी
बिहार में अपनी जमीन मजबूत करने के लिए भाजपा लंबे समय से काम कर रही है. बिहार में लोकसभा चुनाव से जुड़ा भाजपा का महत्वपूर्ण कदम तब सामने आया था जब केंद्र ने जन नायक कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने का ऐलान किया था. इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोकसभा चुनाव में बिहार को लेकर भाजपा बेहद सजग है. नीतीश के कदम से यह पुख्ता हो गया है कि भाजपा किसी भी मोर्चे पर इंडी गठबंधन को सिर नहीं उठाने देना चाहती.
कांग्रेस के लिए नीतीश अब गिरगिरट
बिहार में सत्ता परिवर्तन से कांग्रेस इतनी खफा है कि उसने नीतीश कुमार की तुलना ‘गिरगिट’ से कर दी है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि देश में 'आया राम-गया राम' जैसे कई लोग हैं. पहले वे और हम मिलकर लड़ रहे थे. जब मैंने लालू (प्रसाद) जी और तेजस्वी (यादव) जी से बात की तो उन्होंने भी कहा कि नीतीश जा रहे हैं. यदि कुमार रुकना चाहते तो वह रुक सकते थे लेकिन वह जाना ही चाहते थे. जयराम रमेश ने नीतीश कुमार के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि यह साफ है कि ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ से ध्यान भटकाने के लिए यह ‘राजनीतिक नाटक’ किया जा रहा है. बार-बार राजनीतिक साझेदार बदलने वाले नीतीश कुमार रंग बदलने में गिरगिटों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं.
पहले भाजपा में ही थे..
बता दें कि नीतीश कुमार 18 महीने पहले भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को छोड़कर अगस्त 2022 में महागठबंधन में शामिल हुए थे. तब उन्होंने भाजपा पर जद(यू) (जनता दल-यूनाइटेड) को बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाया था.
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