भारतीयों को जीवनदान...इमोशन या बिजनेस इक्वेशन, जानिए क्यों भारत को स्पेशल ट्रीटमेंट देता है कतर

कतर की जेल में बंद भारत के 8 नौसैनिकों को रिहा कर दिया गया है. इनमें से सात की घर वापसी भी हो गई है. 18 महीने तक चले ट्रायल के बाद कतर की कोर्ट ने उन्हें सजा-ए-मौत दे दी. लेकिन जिस तरह से वैश्विक मंच पर भारत मजबूती के साथ उभर रहा है, ये उसकी बड़ी कूटनीतिक सफलता मानी जा रही है

Feb 12, 2024 - 17:01
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भारतीयों को जीवनदान...इमोशन या बिजनेस इक्वेशन, जानिए क्यों भारत को स्पेशल ट्रीटमेंट देता है कतर

कतर (Qatar) की जेल में बंद भारत के 8 नौसैनिकों को रिहा कर दिया गया है. इनमें से सात की घर वापसी भी हो गई है. 18 महीने तक चले ट्रायल के बाद कतर की कोर्ट ने उन्हें सजा-ए-मौत दे दी. लेकिन जिस तरह से वैश्विक मंच पर भारत मजबूती के साथ उभर रहा है, ये उसकी बड़ी कूटनीतिक सफलता मानी जा रही है. भारत की तेज रफ्तार भाग रही अर्थव्यवस्था के साथ-साथ दूसरे देशों के साथ मजबूत हो रहे रिश्तों की ये जीत है. कतर (Qatar) के साथ भारत के रिश्ते काफी मजबूत हैं. कतर भी भारत को स्पेशल ट्रीटमेंट देता है. साल 2017 में जब चार खाड़ी देशों ने उसपर प्रतिबंध लगाए थे तो भारत ने भोजन और दवाएं कतर भेजी थीं. आकार में भारत के त्रिपुरा से कुछ ही बड़े देश कतर की कुल 25 लाख की आबादी है, जिसमें से 7.5 लाख भारतीय ही हैं. कतर जानता है कि भारत को नाराज करके उसे कुछ नहीं मिलेगा. जिस तरह से मिडिल ईस्ट के देश भारत के करीब आ रहे हैं, उससे कतर को भी भारत की जरूरत महसूस हो रही है. वो देख रहा है कि कैसे यूएई जैसे देश भी भारत से नजदीकी बढ़ा रहे हैं. ऐसे में वो वह भारत के साथ रिश्तों को बिगाड़ना नहीं चाहता है.  

कैसे हैं भारत और कतर के कारोबारी रिश्ते 

भारत और कतर के कारोबारी रिश्ते काफी मजबूत हैं. साल 1973 में दोनों देशों के बीच कारोबारी रिश्ते की शुरुआत हुई थी. दोनों देशों के बीच 50 साल पुराना ये रिश्ता काफी मजबूत है. दोनों के आयात-निर्यात का आंकड़ा देखें तो वित्त वर्ष 2022-23 में भारत और कतर के बीच 15.7 अरब डॉलर से अधिक का कारोबार हुआ है, जिसमें तेल, अनाज, गैस का सबसे अधिक था. भारत गैस आपूर्ति के लिए कतर पर निर्भर है. भारत को लगभग 80 फीसदी गैस की आपूर्ति अकेले कतर करता है. वहीं अनाज खासकर गेंहू, आभूषण, धातु, सब्जियां, कपड़े, मैन्युफैक्टरिंग गुड्स के लिए कतर भारत पर निर्भर है.  

कतर के लिए भारत है जरूरी 

कतर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के मुताबिक भारत की 6000 से ज्यादा छोटी-बड़ी कंपनियां वहां कारोबार कर रही है. 7.5 लाख से अधिक भारतीय कतर की इकोनॉमी में बड़ी भागीदारी निभाते हैं. कतर की इकॉनमी में भारतीयों का बड़ा रोल है। कतर की कुल आबादी लगभग 25 लाख है, जिसमें से 7.5 लाख भारतीय हैं. इतना ही नहीं कतर काे इंफ्रास्ट्रक्चर भारतीय मजदूरों पर निर्भर है. सिर्फ आयात-निर्यात ही नहीं कतर ने भारत में कई निवेश किए है.वहीं भारत ने भी कतर में उर्वरक, प्राकृतिक गैस, रासायनिक उद्योग में निवेश किया है. 

भारत के लिए क्यों जरूरी है कतर 

 2900 किमी की दूरी के बावजूद भारत और कतर (India-Qatar Relation)के बीच रिश्तों में काफी मजबूती है. दोनों देशों के बीच बिजनेस एक ऐसा सूत्र है जिससे कतर को फायदा होता है. कतर ने भारत को एनर्जी सिक्योरिटी के क्षेत्र में बड़ी गारंटी दी है. लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के लिए हमारी निर्भरता कतर पर है. भारत अपने कुल एलएनजी का 40 फीसदी कतर से मंगाता है. वहीं कतर के कुल एलएनजी निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 15 फीसदी की है. यानी खरीदार के तौर पर भारत का अहम रोल है. 

भारत को खास ट्रीटमेंट देता है कतर 

क्षेत्रफल के मामले में त्रिपुरा से कुछ ही बड़े देश कतर (11571 वर्ग किमी) के लिए भारत खास स्थान रखता है. कारोबार के मामले में कतर ने भारत को भारी डिस्काउंट दिया है. साल 2016 में कतर ने भारत को भारी छूट के साथ LNG निर्यात किया. भारत को 50% से अधिक के डिस्काउंट पर एलएनसी उपलब्ध करवाई. साल 2016 में भारत के लिए कतर एनएलजी की कीमतें 5 डॉलर प्रति मीट्रित मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट करने पर राजी हो गया, जबकि साल 2015 में उसने एलएनजी 12 डॉलर प्रति मीट्रिक मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट पर खरीदा था. इससे भारत को अरबों डॉलर की बचत हुई थी. इतना ही नहीं कतर ने भारत को 12000 करोड़ रुपये चुकाने में भी छूट दी. दरअसल भारत को बतौर जुर्माना ये रकम कतर का चुकाना था, लेकिन कतर ने बाद में इसमें भारत को छूट दे दी.  

भारत ने भी निभाई कतर से दोस्ती  

ऐसा नहीं है कि दोस्ती सिर्फ कतर ने निभाई है. हर मौके पर भारत ने भी समान पहल की है. साल 2017 में जब खाड़ी देशों के बीच मतभेद हो गया, भू-राजनीतिक वजहों से पांच खाड़ी देशों सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, इजिप्ट ने कतर से अपने रिश्ते खत्म कर लिए, कतर के विमानों को अपने हवाई क्षेत्र में आने से रोक दिया, तब भारत कतर की मदद के लिए खड़ा हुआ. भारत के लिए वो दोहरी चुनौती थी, क्योंकि कतर के बायकॉट की अगुवाई सऊदी अरब कर रहा था, जिससे भारत के अच्छे कारोबारी रिश्ते थे. ऐसे में भारत से किनारा करने के बजाए तटस्थता की नीति अपनाई और संयम के साथ स्थिति को नियंत्रित किया. 

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