भोपाल की इन मुस्लिम बहुल सीटों पर क्या हो पाएगा उलटफेर? इन 2 योजनाओं के सहारे मैदान में BJP
मध्य प्रदेश में होने जा रहे असेंबली चुनाव में 1-1 सीट के लिए घमासान मचा है. ऐसी ही 2 सीटें हैं भोपाल उत्तर और भोपाल मध्य. ये सीटें मुस्लिम बहुल हैं.
2023: मध्य प्रदेश में होने जा रहे असेंबली चुनाव में बीजेपी-कांग्रेस समेत सभी दलों के बीच जोर-आजमाइश जारी है. भोपाल में भोपाल उत्तर और भोपाल मध्य नाम की 2 मुस्लिम बहुल सीटें हैं, जिन पर कब्जे के लिए दोनों दल ताकत लगा रहे हैं. फिलहाल इन दोनों सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है. हालांकि बीजेपी इन सीटों पर जीत हासिल करने के लिए पूरी हर संभव प्रयास कर रही है.
भोपाल उत्तर सीट पर 50 फीसदी मुस्लिम मतदाता
राजनीतिक एक्सपर्टों के मुताबिक भोपाल उत्तर और मध्य भोपाल दो विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा है और यही वर्ग इन सीटों पर चुनावी नतीजों को तय करते हैं. भोपाल उत्तर सीट (Bhopal North Assembly Seat) से कांग्रेस के आरिफ अकील अरसे से विधायक हैं. वे 1990 से लगातार चुनाव लड़ते आ रहे हैं और अब तक 6 बार विधायक रहे हैं. वर्ष 1993 के बाबरी ढांचा विध्वंस के बाद के चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार से हारे थे. इस बार स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण उनके बेटे आतिफ अकील कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं.
आतिफ अकील के लिए मुसीबत बने चाचा
यह वह सीट है जहां 50 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं. यही कारण है कि यहां कांग्रेस के उम्मीदवार आरिफ अकील लगातार चुनाव जीतते आए हैं.
इस बार उनका बेटा आतिफ अकील मैदान में है और उनके लिए चाचा आमिर अकील और कांग्रेस के बागी नासिर इस्लाम मुसीबत बने हुए हैं. दोनों चुनाव मैदान में हैं. यहां भाजपा ने आलोक शर्मा को अपने उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा है.
तीन तलाक कानून के सहारे बीजेपी
भोपाल उत्तर (Bhopal North Assembly Seat) में भाजपा और कांग्रेस मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने के लिए हर तरह के दांव चल रही है. भाजपा जहां तीन तलाक कानून को खत्म किए जाने और लाडली बहना योजना को जोर-शोर से जनता के बीच ले जा रही है. वहीं कांग्रेस की ओर से भाजपा की नीतियों पर हमले किए जाने के साथ जनकल्याणकारी योजना का वादा कर रही है.
भोपाल मध्य सीट पर बीजेपी का जोर
इसी तरह राजधानी की भोपाल मध्य सीट (Bhopal Central Assembly Seat) भी मुस्लिम बाहुल्य है, जहां 40 फीसदी से ज्यादा मतदाता मुस्लिम और 25 प्रतिशत से ज्यादा अनुसूचित जाति के हैं. कांग्रेस ने जहां एक बार फिर विधायक आरिफ मसूद को मैदान में उतारा है, वहीं भाजपा ने ध्रुव नारायण सिंह को उम्मीदवार बनाया है. भाजपा के उम्मीदवार वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कर विधायक रह चुके हैं.
राहुल गांधी कर चुके हैं रोड शो
इस सीट (Bhopal Central Assembly Seat) पर जीत हासिल करने के लिए दोनों ही दल अपनी ताकत झोंके हुए हैं. कांग्रेस के लिए तो पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी भी रोड शो कर चुके हैं, वहीं भाजपा की ओर से बड़े नेता सक्रिय हैं. वर्तमान में यह दोनों मुस्लिम बाहुल्य सीटें कांग्रेस के कब्जे में है. लिहाजा कांग्रेस की कोशिश है कि उसका कब्जा बरकरार रहे तो बीजेपी इन दोनों ही सीटों को छीनने की कोशिश में लगी हुई है. दोनों ही स्थान पर मुकाबला रोचक है और हार जीत किसी की भी संभव है.
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