लोकसभा चुनाव से पहले राम मंदिर फिर CAA... मोदी सरकार का समर्थकों को डबल डोज, क्यों किया 4 साल इंतजार? पूरी क्रोनोलॉजी
मोदी सरकार ने लंबे इंतजार के बाद आखिरकार नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लागू करने की घोषणा कर दी है. लोकसभा चुनाव 2024 से पहले राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद सीएए लागू करने को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दोहरा मास्टर स्ट्रोक बताया जा रहा
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार (11 मार्च) को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के नियमों को अधिसूचित कर दिया है. इसके साथ ही कानून देश भर में लागू हो गया है. लोकसभा से 9 दिसंबर, 2019 और राज्यसभा से 11 दिसंबर 2019 को पास होने के बावजूद नागरिकता संशोधन कानून नोटिफाई नहीं हो पाया था. अब चार साल से ज्यादा इंतजार के बाद मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले इस कानून को लागू करने का फैसला लिया है.
2016 और 2019 में पेश किया जा चुका था नागरिकता संशोधन विधेयक
नागरिकता संशोधन विधेयक को पहले 8 जनवरी, 2019 को लोकसभा द्वारा पारित किया गया था. 16वीं लोकसभा के विघटन के साथ ही वह समाप्त हो गया था. इसलिए विधेयक को 17वीं लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने इसे फिर से पेश किया था. दोनों सदनों से पास होने और राष्ट्रपति की सहमति के बाद यह विधेयक अधिनियम बन गया.
इससे पहले साल 2016 में भी नागरिकता संशोधन विधेयक (CAA Bill) लोकसभा में 1955 के नागरिकता अधिनियम में संशोधन करने के लिए पेश किया गया था. तब इस विधेयक को एक संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया था. समिति की रिपोर्ट बाद में 7 जनवरी, 2019 को पेश की गई थी.
नागरिकता छिनने का नहीं, पीड़ित अल्पसंख्यकों नागरिकता देने का कानून
नागरिकता संशोधन अधिनियम पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के आधार पर हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों से संबंधित व्यक्तियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान करता है. इस कानून का मकसद किसी की नागरिकता छीनना नहीं बल्कि पीड़ित लोगों को नागरिकता देना है. शरणार्थियों को छह साल के भीतर भारत की नागरिकता दी जाएगी. संशोधन के जरिए इन शरणार्थियों की नागरिकता के लिए निवास की जरूरत को 11 साल से घटाकर पांच साल कर दिया गया.
नागरिकता संशोधन कानून को लेकर उड़ाई गईं कई अफवाहें
संसद में नागरिकता संशोधन से जुड़ा विधेयक पेश करने पर देशभर में काफी विरोध हुआ था. अफवाहें उड़ाई गईं कि सीएए पारित होने के बाद मुसलमान अपनी नागरिकता खो देंगे. विपक्षी दलों और खासकर कट्टरपंथी इस्लामवादी और वामपंथी नक्सली ताकतों ने यह अफवाह भी फैलाई कि सीएए लागू होने के बाद मुसलमानों को डिटेंशन सेंटर में भेज दिया जाएगा. दिल्ली का शाहीन बाग विरोध प्रदर्शन का सेंट्रल स्पॉट बन गया था.
शाहीन बाग एंटी सीएए प्रोटेस्ट में सड़क जाम पर सुप्रीम कोर्ट नाराज
दिल्ली में विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से जामिया, निज़ामुद्दीन, दरियागंज और उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुआ. ये विरोध प्रदर्शन सड़क पर शक्ति के खुले प्रदर्शन के अलावा और कुछ नहीं था. 15 दिसंबर 2019 को शाहीन बाग में मुस्लिम समाज की महिलाएं धरने पर बैठ गईं. उन्होंने नोएडा और सरिता विहार को जोड़ने वाली मुख्य सड़क को जाम कर दिया. यह अनिश्चितकालीन जाम सड़क पर शक्ति प्रदर्शन के जरिए केंद्र सरकार को अपनी मांग मानने के लिए मजबूर करने की एक कोशिश थी. सुप्रीम कोर्ट को भी कहना पड़ा कि शाहीन बाग में सीएए विरोधी प्रदर्शनकारी सार्वजनिक सड़क को जाम नहीं कर सकते. वह दूसरों के लिए असुविधा पैदा नहीं कर सकते.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान दिल्ली दंगा
जामिया और दिल्ली गेट में हिंसक विरोध प्रदर्शन और पुलिस और सुरक्षा कर्मियों के साथ झड़प की सूचना मिली. उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांद बाग और जाफराबाद में मुस्लिम प्रदर्शनकारियों ने शाहीन बाग की शैली अपनाई और सड़क जाम कर दी. बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान दिल्ली में तीन दिनों तक सांप्रदायिक दंगे की आग भी भड़की. इसके बाद कोरोनावायरस का कहर आया और देश में लॉकडाउन लग गया. इन सब चक्करों शुरुआत में सीएए को नोटिफाई करने में देरी हुई.
राम मंदिर के बाद सीएए का स्ट्रोक, बंगाल में पहले थाह भी लिया
इसके बाद केंद्र सरकार ने सीएए को लागू करने के लिए ऐसे ही उचित मौके का इंतजार किया. मामले को पकने दिया और ठंडा होने दिया. अब लोकसभा चुनाव 2024 के पहले अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के बाद रामलला की प्राण प्रतिष्ठा और फिर सीएए को लागू करने की घोषणा कर अपने समर्थकों को डबल डोज दे दिया. सीएए नोटिफाई करने से पहले पश्चिम बंगाल में भाजपा नेताओं के बयानों पर प्रतिक्रिया को देखकर मोदी सरकार ने विपक्षी की एकता और ताकत की थाह भी ली.
सड़कों पर होने वाले उग्र शक्ति प्रदर्शन से निपटने की तैयारी
एंटी सीएए आंदोलन के बाद सड़कों पर होने वाले शक्ति प्रदर्शन के तौर पर दो-दो किसान आंदोलनों को शांत कर सरकार ने सुरक्षा के इंतजामों का लेयर भी तैयार कर लिया. खासकर असम और पश्चिम बंगाल में होने वाले उग्र विरोधों के मद्देनदर सीमा सुरक्षा बलों का दायरा भी पहले ही 50 किलोमीटर से बढ़ाकर सौ किलोमीटर कर दिया गया था. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी पहले कहा था कि लोकसभा चुनाव 2024 से पहले कि सीएए नियमों को अधिसूचित और लागू किया जाएगा.
मानवीय दृष्टि से धार्मिक शरणार्थियों को देश में मूलभूल अधिकार देने की पहल
केंद्र सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, CAA नागरिकता देने का कानून है. इससे किसी भी भारतीय नागरिक की नागरिकता नहीं जाएगी, भले ही वो किसी भी धर्म का हो. यह सिर्फ तीन पड़ोसी देशों के उन लोगों के लिए है, जिनको बरसों तक उत्पीड़न सहना पड़ा है. उनके पास भारत के अलावा दुनिया में और कोई जगह नहीं है. सरकार ने कहा, भारत का संविधान हमें यह अधिकार देता है कि मानवतावादी दृष्टिकोण से धार्मिक शरणार्थियों को मूलभूल अधिकार मिले और ऐसे शरणार्थियों को नागरिकता दी जा सके.
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