संदेशखाली हिंसा: क्या अनुच्छेद 338 के तहत ममता बनर्जी की गद्दी जा सकती है?

क्या संदेशखाली कांड की वजह से ममता बनर्जी अपने सीएम पद से हाथ धो बैठेंगी. क्या नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल्ड कास्ट (NCSC) की राष्ट्रपति शासन की सिफारिश ममता पर भारी कर सकती है.

Feb 17, 2024 - 16:18
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संदेशखाली हिंसा: क्या अनुच्छेद 338 के तहत ममता बनर्जी की गद्दी जा सकती है?

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में हुआ कांड (Sandeshkhali Case) सीएम ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के गले की फांस बन गया है. महिलाओं से यौन उत्पीड़न और उनकी जमीन हड़पने के मामला सामने आने के बाद ममता बनर्जी सरकार पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि जिस शाहजहां शेख (Shah Jahan Sheikh) पर आरोप लगे हैं वह टीएमसी का नेता है. इस बीच, नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल्ड कास्ट (NCSC) की टीम ने संदेशखाली का दौरा किया और इसके बाद राष्ट्रपति को अपनी रिपोर्ट सौंपी. ममता बनर्जी के लिए टेंशन की बात ये है कि NCSC ने अनुच्छेद 338 के तहत पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर दी है. आइए समझते हैं कि क्या अनुच्छेद 338 के तहत ममत बनर्जी की कुर्सी जा सकती है.

NCSC ने बढ़ाई ममता की मुश्किल

बता दें कि नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल्ड कास्ट (NCSC) का डेलीगेशन गुरुवार को संदेशखाली के दौरे पर गया था. जहां बड़ी संख्या में महिलाओं ने ये दावा किया था कि टीएमसी नेता शाहजहां शेख और उनके सपोर्टर्स ने गुंडागर्दी करके उनकी जमीन कब्जा कर ली. इसके अलावा उनका यौन उत्पीड़न भी किया

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश

इसके बाद NCSC के चीफ अरुण हलदर ने बताया कि संदेशखाली के लोगों पर जो अत्याचार और हिंसा हुई है उसकी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंप दी है. हमने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की है. जान लें कि संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत NCSC को अनुसूचित जाति के संवैधानिक सुरक्षा उपायों के कामकाज की रिपोर्ट राष्ट्रपति को हर साल सौंपनी होती है.

क्या चली जाएगी ममता की कुर्सी?

NCSC के चीफ अरुण हलदर ने आगे कहा कि अगर राज्य सरकार किसी वर्ग के अधिकारों की रक्षा करने में फेल हो जाती है तो इस आधार पर उस राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है. पश्चिम बंगाल में दूसरे नंबर की सबसे बड़ी आबादी अनुसूचित जाति की है. उनकी प्रॉपर्टी और अधिकारी को जबरन छीन लिया गया है.

संदेशखाली केस क्या है?

दरअसल, करीब एक महीने पहले ED ने राशन घोटाला मामले में TMC नेता शाहजहां शेख के ठिकानों पर छापा मारा था. इस दौरान ED टीम पर हमला भी हुआ था. तब से शाहजहां शेख फरार है. उसके फरार होने के बाद सामने आई संदेशखाली की महिलाओं ने शाहजहां शेख और उसके साथियों पर यौन उत्पीड़न, हिंसा और जमीन हड़पने के आरोप लगाए हैं.

संदेशखाली की महिलाओं की आपबीती

संदेशखाली की महिलाओं का आरोप है कि शाहजहां शेख के लोग गांव में घर-घर जाकर सर्वे करते थे. और घर में कोई सुंदर महिला या लड़की दिखती तो वो उसे पार्टी ऑफिस ले जाते थे. आरोप है कि शेख और उसके साथी महिला या लड़की को कई रातों तक TMC के पार्टी ऑफिस में रखते थे. ये भी आरोप है कि TMC के पार्टी ऑफिस में महिलाओं और लड़कियों का रेप किया जाता था.

शाहजहां शेख पर क्या हैं आरोप?

यही नहीं संदेशखाली की महिलाओं का आरोप है कि TMC के लोग मारपीट करके उनकी जमीन पर कब्जा कर लेते हैं. 9 फरवरी को महिलाओं ने प्रदर्शन किया और शाहजहां समर्थक शिवप्रसाद हाजरा के पोल्ट्री फार्म में आग लगा दी. आरोप है कि ये पोल्ट्री फार्म गांव वालों की जमीन पर जबरन कब्जा करके बनाया गया था. 13 फरवरी को इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया और राज्य सरकार को एक हफ्ते के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया.

वहीं, राष्ट्रीय महिला आयोग ने अपनी फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में दावा किया कि TMC के नेता और पुलिस अधिकारी महिलाओं का उत्पीड़न करते थे. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने भी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संदेशखाली मामले पर रिपोर्ट सौंपी है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट भी संदेशखाली मामले पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है. हालांकि, सुनवाई की तारीख अभी नहीं बताई गई है.

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