हाथ में संकल्प, माथे पर टीका...रामलला के दरबार में नरेंद्र मोदी की भर आईं आंखें
500 साल का संघर्ष आज पूरा हुआ. अयोध्या में फिर से रामलला मंदिर में विराजे हैं. भारत का जन-जन, हर मन खुश है. आनंदित है. पीएम नरेंद्र मोदी के लिए यह अवसर विशेष है. आज जब वह प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए परिसर में आए तो भावुक हो गए. उन्होंने संभालने की कोशिश की लेकिन चेहरे पर भाव प्रकट हो गए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैसे तो आज साढ़े 11 बजे ही अयोध्या मंदिर परिसर में पहुंच गए थे लेकिन ठीक 12 बजे वह हाथ में चांदी का छत्र और चुनरी लेकर मंदिर की तरफ बढ़ते दिखाई दिए. क्रीम कलर का कुर्ता, ऊपर से हल्के पीले रंग का पटका डाले वह मंदिर की तरफ कदम बढ़ा रहे थे. अतिथियों में भी पीएम को देखने की उत्सुकता बढ़ी. कुछ ने मोबाइल से तस्वीरें लीं. टीवी पर सीधा प्रसारण भेज रहा कैमरा पीएम को फोकस किए हुए था. उनके कदम मंदिर की सीढ़ियों के करीब थे, पूरा देश टकटकी लगाए उन्हें देख रहा था. पीएम मोदी ने अचानक सिर नीचे झुकाया और भावुक हो गए. (नीचे वीडियो ठीक 1.11 मिनट बाद देखिए
जी हां, पीएम ने अपनी भावनाएं छिपानी चाहीं लेकिन कुछ पल के लिए ही सही वह द्रवित हो गए. उन्हें शायद अयोध्या में लिया गया तीन दशक पुराना संकल्प याद आ रहा होगा. तब वह भाजपा के नेता की हैसियत से 14 जनवरी 1992 को रामलला के दर्शन करने पहुंचे थे.
आज के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तब एक संकल्प लिया था. उन्होंने कहा था कि अब वह रामलला के दरबार में तभी आएंगे जब मंदिर बन जाएगा. आज उनका संकल्प पूरा हुआ है और वह खुद भगवान की प्राण प्रतिष्ठा के लिए यजमान बनकर परिसर में मौजूद हैं. शायद यह सब सोचकर पीएम भावुक हो गए.
ऐसे में उन्होंने पहले सिर झुकाया फिर अतिथियों से विपरीत दिशा में देखा. जैसे रामलला के मंदिर को निहार रहे हों या अपनी भावनाओं पर काबू रखना चाह रहे हों. अगले ही पल मंदिर की सीढ़ियों पर पीएम मोदी पहुंच चुके थे. आगे उन्होंने राजा राम की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में हिस्सा लिया. इसके साथ ही 500 साल लंबे संघर्ष के बाद रामलला अयोध्या मंदिर में विराजमान हो गए.
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