अब सिर्फ एक क्लिक पर देख सकेंगे सभी जजों की जायदाद, सुप्रीम कोर्ट ने उठाया बड़ा कदम

सुप्रीम कोर्ट के जजों ने बड़ा कदम उठाते हुए सर्वसम्मति से फैसला लिया है कि सभी जजों की जायदाद को पब्लिक किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर इससे जुड़ी जानकारी मौजूद रहेगी. यह फैसले दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के घर मिले कैश कांड के बाद लिया गया है

Apr 3, 2025 - 17:20
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अब सिर्फ एक क्लिक पर देख सकेंगे सभी जजों की जायदाद, सुप्रीम कोर्ट ने उठाया बड़ा कदम

सुप्रीम कोर्ट ने अपने जजों की जायदाद की जानकारी को सार्वजनिक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. एक अभूतपूर्व कदम के तहत सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों ने 1 अप्रैल को हुई मीटिंग में सर्वसम्मति से अपनी संपत्तियों की जानकारी मुख्य न्यायाधीश (CJI) को सौंपने और इसे सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करने का फैसला लिया. यह फैसला जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े विवाद के बाद लिया गया है. उनके आधिकारिक आवास पर जली हुई नकदी मिलने के बाद यह मामला चर्चा में आया था.

पहले क्या था नियम?

मौजूदा नियमों के मुताबिक सभी जजों को पद संभालने के बाद अपनी संपत्तियों की जानकारी चीफ जस्टिस को देनी होती है, लेकिन इसे सार्वजनिक रूप से जारी करने की कोई अनिवार्यता नहीं थी. हालांकि सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर जजों की जायदाद की जानकारी के लिए एक अलग खंड मौजूद है, लेकिन इसे नियमित रूप से अपडेट नहीं किया गया था.

क्या है जस्टिस यशवंत वर्मा केस?

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न्यायपालिका की निष्पक्षता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच आया है. खासतौर पर जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े विवाद के बाद इस मुद्दे ने जोर पकड़ लिया. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को साफ किया कि जस्टिस वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर किए जाने के बाद कोई न्यायिक कार्य नहीं सौंपा जाएगा. उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर करने का केंद्र सरकार का आदेश शुक्रवार को जारी हुआ. यह फैसला 14 मार्च को उनके सरकारी आवास पर आग लगने और वहां भारी मात्रा में जली हुई नकदी मिलने के बाद लिया गया.

वापस लिया गया यशवंत वर्मा से काम

सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम, जिसकी अध्यक्षता चीफ जस्टिस संजीव खन्ना कर रहे हैं, ने पहले ही उनका तबादला करने की सिफारिश की थी. कोलेजियम ने साफ किया कि यह तबादला जस्टिस वर्मा के खिलाफ चल रही आंतरिक जांच से अलग है. पिछले हफ्ते चीफ जस्टिस खन्ना ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की और दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को निर्देश दिया कि वे न्यायमूर्ति वर्मा को कोई न्यायिक काम न दें. इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिक डीके उपाध्याय ने उनके सभी न्यायिक कार्य वापस ले लिए.

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