चीन के हथियारों की फिर खुली पोल, थाईलैंड के खिलाफ दागते समय फटा रॉकेट सिस्टम, कंबोडिया के 8 जवानों की मौत

कंबोडियाई सेना चीन में निर्मित PHL-81 टाइप रॉकेट सिस्टम का इस्तेमाल करती है. यह 80 के दशक में सोवियत संघ के BM021 ग्रैड मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम का कॉपी वर्जन है.

Dec 26, 2025 - 16:47
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चीन के हथियारों की फिर खुली पोल, थाईलैंड के खिलाफ दागते समय फटा रॉकेट सिस्टम, कंबोडिया के 8 जवानों की मौत

पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने भले चीन के JF-17 थंडर फाइटर जेट को लीबिया को बेच दिया है, लेकिन हकीकत ये है कि चीनी हथियारों की पोल लगातार खुल रही है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद ताजा मामला थाईलैंड-कंबोडिया जंग का है, जहां दागने के दौरान चीनी रॉकेट सिस्टम के परखच्चे उड़ गए और आठ कंबोडियाई सैनिकों की जान चली गई. कंबोडिया की सेना थाईलैंड के खिलाफ इस मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम (MLRS) का इस्तेमाल कर रही थी.

सोशल मीडिया पर थाईलैंड-कंबोडिया युद्ध का वीडियो वायरल है. इसमें कंबोडियाई सैनिक एक मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम को दागते हुए देखे जा सकते हैं. रॉकेट सिस्टम के करीब आधा दर्जन कंबोडियाई सैनिक खड़े हुए भी दिखाई पड़ रहे हैं. एक सैनिक मोबाइल से फायरिंग का वीडियो बनाते हुए भी देखा जा सकता है. MLRS एक के बाद एक छह रॉकेट दाग देता है, लेकिन उसके बाद अचानक रॉकेट सिस्टम फट जाता है और उसमें आग लग जाती है.

रूस से कॉपी कर चीन ने बनाया था PHL-81

कंबोडियाई सेना, चीन में निर्मित PHL-81 टाइप रॉकेट सिस्टम का इस्तेमाल करती है. यह 80 के दशक में रूस (सोवियत संघ) के 'BM021 ग्रैड' मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम का वर्जन (कॉपी) है. खास बात है कि भारतीय सेना भी इन ग्रैड MLRS को ऑपरेट करती है, जो 20-22 सेकंड में 40 रॉकेट फायर कर सकता है.

युद्ध शुरू होने पर कंबोडिया ने थाईलैंड के खिलाफ इन रॉकेट सिस्टम के इस्तेमाल की धमकी दी थी, लेकिन फायरिंग के दौरान MLRS के फटने से चीनी हथियार और सैन्य प्रणालियों पर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं.

आसिम मुनीर ने लीबिया से बोला झूठ

हाल में पाकिस्तान ने उत्तरी अफ्रीकी देश लीबिया से JF-17 फाइटर जेट सौदा किया है. JF-17 फाइटर जेट को चीन, पाकिस्तान में बनाता है. पाकिस्तानी चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) आसिम मुनीर ने लीबिया को ये कहकर JF-17 बेचा है कि इस चीनी लड़ाकू विमान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के रफाल (राफेल) और सुखोई जैसे फाइटर जेट मार गिराए थे. जबकि हकीकत ये है कि पाकिस्तान ने आज तक भारतीय लड़ाकू विमानों को मार गिराने का कोई भी सबूत पेश नहीं किया है. यहां तक की इन फाइटर जेट के मलबे की एक भी तस्वीर या वीडियो भी पाकिस्तान ने जारी नहीं किया है.

ब्रह्मोस को डिटेक्ट तक नहीं कर पाया था चीनी HQ-9 डिफेंस सिस्टम 

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की ओर से इस्तेमाल की जाने वाली चीनी एयर डिफेंस सिस्टम HQ-9 और LY-80 को भारत की एयर-स्ट्राइक और ब्रह्मोस मिसाइल के हमले की कानोंकान खबर तक नहीं लगी थी. चीनी सैन्य प्रणालियां, भारतीय मिसाइलों को काउंटर करना तो दूर, उन्हें ठीक से डिटेक्ट तक कर पाई थी.

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