12वीं में बायोलॉजी पढ़ी है? पशु डॉक्टर बनकर भी बना सकते हैं करियर, जानिए योग्यता, कोर्स और कॉलेज

12वीं बायोलॉजी स्ट्रीम से पढ़ाई करने वाले छात्र MBBS के अलावा पशु डॉक्टर भी बन सकते हैं। वेटरनरी साइंस के क्षेत्र में करियर और कमाई के अच्छे अवसर हैं। अनुभवी पशु चिकित्सक सालाना 10 से 12 लाख रुपये तक कमा सकते हैं। मध्य प्रदेश में रीवा, जबलपुर और महू में भी इसकी पढ़ाई होती है।

Oct 19, 2026 - 18:29
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मध्य प्रदेश में बायोलॉजी विषय से 12वीं कक्षा पास करने वाले युवाओं के लिए डॉक्टर बनने का एक और विकल्प वेटरनरी साइंस यानी पशु चिकित्सा के क्षेत्र में मौजूद है. एमबीबीएस में चयन न होने की स्थिति में छात्र पशु चिकित्सक बनकर अपना करियर बना सकते हैं और इस क्षेत्र में सरकारी नौकरी के साथ निजी प्रैक्टिस और पालतू जानवरों के इलाज के जरिए अच्छी कमाई की संभावनाएं हैं.

नीट के जरिए प्रवेश

सीधी वेटरनरी अस्पताल के पशु चिकित्सक डॉ. सलिल कुमार पाठक ने जानकारी दी है कि पशु चिकित्सक बनने के लिए वेटरनरी साइंस की पढ़ाई करनी होती है. पहले ऑल इंडिया प्री वेटरनरी टेस्ट के जरिए प्रवेश मिलता था, लेकिन अब संबंधित पाठ्यक्रमों में प्रवेश नीट-यूजी के अंकों के आधार पर होता है. बैचलर ऑफ वेटरनरी साइंस एंड एनिमल हसबेंड्री पाठ्यक्रम की अवधि साढ़े पांच साल होती है, जिसमें एक साल की अनिवार्य इंटर्नशिप शामिल है. सामान्य तौर पर 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी विषयों के साथ सामान्य वर्ग के लिए 50 प्रतिशत अंकों का मानदंड तय किया गया है.

प्रमुख शिक्षण संस्थान

मध्य प्रदेश में पशु चिकित्सा की पढ़ाई के लिए जबलपुर, महू और रीवा प्रमुख केंद्र हैं. यहां बैचलर ऑफ वेटरनरी साइंस एंड एनिमल हसबेंड्री की पढ़ाई के लिए कॉलेज संचालित हैं, जो नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर से संबद्ध हैं. इसके अलावा पशुपालन से जुड़े दो वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम के लिए जबलपुर, महू, रीवा, भोपाल और मुरैना में वेटरनरी पॉलिटेक्निक कॉलेज संचालित किए जा रहे हैं.

प्रमुख पाठ्यक्रम और विकल्प

पशु चिकित्सा और पशुपालन के क्षेत्र में उपलब्ध प्रमुख पाठ्यक्रमों में बैचलर ऑफ वेटरनरी साइंस एंड एनिमल हसबेंड्री, दो वर्षीय मास्टर ऑफ वेटरनरी साइंस और वेटरनरी फार्मेसी से संबंधित डिप्लोमा शामिल हैं. मास्टर डिग्री के लिए संबंधित स्नातक डिग्री और विश्वविद्यालय के निर्धारित प्रवेश नियमों को पूरा करना आवश्यक होता है और छात्र अपनी योग्यता के अनुसार डिग्री या डिप्लोमा का विकल्प चुन सकते हैं.

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