तथ्य या कानून की मामूली गलती दिखाने मात्र से 'लेटर्स पेटेंट बेंच' सिंगल बेंच के फैसले में दखल नहीं दे सकती: सुप्रीम कोर्ट

Oct 19, 2026 - 18:40
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तथ्य या कानून की मामूली गलती दिखाने मात्र से 'लेटर्स पेटेंट बेंच' सिंगल बेंच के फैसले में दखल नहीं दे सकती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच अपनी 'लेटर्स पेटेंट' अधिकारिता (Jurisdiction) का इस्तेमाल करते हुए रिट अधिकारिता के तहत दिए गए सिंगल जज के फैसले में केवल इसलिए दखल नहीं दे सकती, क्योंकि उसका मामले को देखने का नजरिया अलग है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच ने कहा, "तथ्य या कानून की कोई मामूली गलती दिखाने मात्र से 'लेटर्स पेटेंट बेंच' को रिट कोर्ट के फैसले में दखल देने का अधिकार नहीं है। अगर संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट कोर्ट का फैसला न्याय, निष्पक्षता और विवेक के अनुरूप है और सार्वजनिक नीति (Public Policy) के खिलाफ नहीं है तो 'लेटर्स पेटेंट बेंच' (मद्रास हाई कोर्ट के 'लेटर्स पेटेंट' के क्लॉज 15 या अन्य हाईकोर्ट के समान प्रावधानों के तहत गठित) रिट कोर्ट के फैसले में दखल देने के लिए अपनी अपीलीय अधिकारिता का इस्तेमाल नहीं कर सकती। सरल शब्दों में कहें तो अगर रिट कोर्ट का फैसला न्यायपूर्ण और उचित है, तो 'लेटर्स पेटेंट बेंच' उसमें दखल नहीं दे सकती।"

कोर्ट ने स्पष्ट किया, "लेटर्स पेटेंट बेंच किसी मामले में तभी दखल दे सकती है, जब निष्कर्ष स्पष्ट रूप से गलत हों और रिकॉर्ड पर ही कोई बड़ी गलती नजर आ रही हो। इसके लिए ठोस आधार होने चाहिए; फैसले में मौजूद किसी छोटी-मोटी गलती को ऐसा ठोस आधार नहीं माना जा सकता।" याचिकाकर्ता आर. सरवनन, जो पेरियार यूनिवर्सिटी में डिप्टी रजिस्ट्रार थे, उन्हें जुलाई 2013 में सेवा से हटा दिया गया। उन पर अनुशासनात्मक जांच के दौरान आरोप लगे थे कि उन्होंने अपनी पत्नी द्वारा संचालित कॉलेज को संबद्धता (Affiliation) दिलाने में प्रभाव डाला, यूनिवर्सिटी की अनुमति के बिना एक घर खरीदा और बिना जरूरी अनुमति के एक सैंट्रो कार खरीदी।

अपनी बर्खास्तगी को चुनौती देते हुए सरवनन मद्रास हाईकोर्ट पहुंचे। सिंगल जज ने माना कि जांच के निष्कर्ष गलत थे और उनके समर्थन में कोई सबूत नहीं था, इसलिए उन्होंने दी गई सजा में दखल दिया। हालांकि, डिवीजन बेंच ने 'लेटर्स पेटेंट' के क्लॉज 15 के तहत यूनिवर्सिटी की अपील को स्वीकार कर लिया, सबूतों पर फिर से विचार किया और बर्खास्तगी का आदेश बहाल किया। व्यथित होकर याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

डिवीजन बेंच का आदेश रद्द करते हुए जस्टिस चंद्रशेखर द्वारा लिखे गए फैसले में कहा गया कि डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के आदेश में दखल देकर गलती की है, जबकि ऐसा केवल इसलिए किया गया, क्योंकि उनका नजरिया अलग है। कोर्ट के अनुसार, केवल विचारों में अंतर होने के आधार पर रिट कोर्ट द्वारा सोच-समझकर लिए गए फैसले में अपीलीय अदालत का दखल देना उचित नहीं है। कोर्ट ने कहा, "हमने मद्रास हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले की जांच की और पाया है कि रिट कोर्ट के एक तर्कसंगत फैसले में डिवीजन बेंच ने बिना किसी ठोस और उचित कारण के दखल दिया। मद्रास हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 'लेटर्स पेटेंट' के क्लॉज 15 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल ऐसे मामले में किया, जहां दखल देने का कोई आधार ही नहीं था।" परिणामस्वरूप, याचिका स्वीकार की गई और सिंगल जज का फैसला बहाल हो गया।

 Case Title : R. SARAVANAN VERSUS PERIYAR UNIVERSITY REP BY ITS REGISTRAR & ORS.

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