70 दिन, 950 किमी और 40 लाख का खर्च: दिग्विजय की 'सनातन यात्रा' से पार्टी ने बनाई दूरी, BJP बोली- चुनावी स्टंट
दिग्विजय सिंह ने उज्जैन से अयोध्या तक 950 KM की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा शुरू की है. 70 दिन की यात्रा पर 30-40 लाख रुपए खर्च का अनुमान है. कांग्रेस ने इस यात्रा से आधिकारिक दूरी बनाई है, जबकि BJP ने इसे चुनावी स्टंट बताया है.
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने उज्जैन से अयोध्या तक की 'सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा' का शंखनाद कर दिया है. करीब 950 किलोमीटर लंबी यह पैदल यात्रा लगभग 70 दिनों में भगवान राम की नगरी अयोध्या पहुंचेगी. यात्रा में हर दिन औसतन 30 से 50 हजार रुपए के हिसाब से कुल 30 से 40 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान है. दिग्विजय सिंह इस यात्रा के जरिए बड़े मंदिरों के चढ़ावे और धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता की मांग उठा रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर यात्रा से दूरी बना रखी है, लेकिन पार्टी के कई नेता इसके समर्थन में खुलकर बोल रहे हैं. कुछ संतों का भी दिग्विजय सिंह को समर्थन मिला है. दूसरी तरफ BJP इसे चुनावी स्टंट बताते हुए हमलावर है, जबकि दिग्विजय की पत्नी अमृता सिंह ने यात्रा को 'अधर्म पर धर्म की विजय' के संकल्प से जोड़ा है.
पूजा-पाठ के साथ शंखनाद
लंबी पैदल यात्रा पर निकलने से पहले दिग्विजय सिंह ने उज्जैन में पत्नी अमृता सिंह के साथ पार्थिव शिवलिंग का विधि-विधान से पूजन किया. इसके बाद चिंतामन गणेश मंदिर और महाकाल मंदिर में दर्शन कर यात्रा की शुरुआत की. दिग्विजय सिंह मंदिरों के चढ़ावे और धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता की मांग को इस यात्रा के जरिए प्रमुखता से उठा रहे हैं. उज्जैन से शुरू हुआ करीब 950 किलोमीटर का यह सफर लगभग 70 दिनों में अयोध्या पहुंचने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है.
30 से 40 लाख तक खर्च
यात्रा पर होने वाला खर्च भी चर्चा में है. छोटे ग्रामीण पड़ावों पर प्रतिदिन करीब 20 से 30 हजार रुपए और बड़े पड़ावों पर 50 से 60 हजार रुपए तक खर्च होने का अनुमान बताया गया है. इस हिसाब से प्रतिदिन औसतन 30 से 50 हजार रुपए का खर्च आ सकता है. करीब 70 दिनों की पूरी यात्रा पर 30 से 40 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान है.
संतों का साथ, कांग्रेस की दूरी
इस यात्रा की सियासी तस्वीर दिलचस्प है. मध्य प्रदेश कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर इससे दूरी बनाई है, लेकिन कांग्रेस के कई बड़े नेता दिग्विजय सिंह के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं. वहीं दूसरी तरफ कई संतों और धर्मगुरुओं का समर्थन भी यात्रा को मिला है. महामंडलेश्वर कंप्यूटर बाबा समेत कई संतों के यात्रा में शामिल होने की बात सामने आई है. ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने भी यात्रा को समर्थन और आशीर्वाद दिया है. अग्निपीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर ब्रह्मर्षि श्रीमद् रामकृष्णानंद जी महाराज ने भी यात्रा का समर्थन किया है
पत्नी ने याद दिलाया 'रावण वध' का संकल्प
दिग्विजय सिंह की यात्रा पर उनकी पत्नी अमृता सिंह का बयान भी चर्चा में है. उन्होंने भगवान राम के रावण वध के संकल्प और लंका पर चढ़ाई का जिक्र करते हुए यात्रा को धर्म और अधर्म की लड़ाई से जोड़ा. अमृता सिंह ने कहा कि जिस तरह भगवान राम ने रावण का वध करने का संकल्प लिया था और भगवान शिव का आशीर्वाद लेकर लंका पर चढ़ाई की थी, उसी तरह दिग्विजय सिंह भी अधर्म करने वालों पर धर्म की विजय का संकल्प लेकर इस रास्ते पर निकले हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि भगवान शिव के आशीर्वाद से दिग्विजय सिंह का संकल्प पूरा होगा.
बेटे ने बताया कितना मुश्किल सफर
दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह ने अपने पिता की उम्र और इस यात्रा की दूरी का जिक्र किया है. उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह की उम्र 79 साल हो गई है और इस उम्र में करीब एक हजार किलोमीटर पैदल चलना आसान नहीं है. जयवर्धन के मुताबिक यात्रा का समापन भगवान राम की नगरी अयोध्या में होगा. उन्होंने यात्रा के उद्देश्य को सनातन धर्म से जोड़ते हुए भगवान कृष्ण के संदेश का जिक्र किया और कहा कि आत्मा ही सनातन है और आत्मा ही परमात्मा है.
चंदा चोरी' पर कांग्रेस हमलावर
दिग्विजय सिंह की यात्रा से पार्टी ने भले ही आधिकारिक दूरी बनाई हो, लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने इसे लेकर BJP पर तीखे हमले किए हैं. जीतू पटवारी ने दावा किया कि इस यात्रा के जरिए 'चंदा चोरी' और 'वोट चोरी' जैसी कथित गड़बड़ियों का पर्दाफाश किया जाएगा. वहीं पीसी शर्मा ने आरोप लगाया कि चंदे से जुड़े मामलों में जो लोग अब तक बचे हुए हैं, इस यात्रा के जरिए उन्हें बेनकाब किया जाएगा.
BJP बोली- सनातन तोड़ने वाली यात्रा
BJP ने दिग्विजय सिंह की यात्रा को लेकर पलटवार किया है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि भगवान के नाम पर यात्रा की जाए तो उसके पीछे भाव भी जरूरी है. मंत्री विश्वास सारंग ने इससे आगे बढ़ते हुए यात्रा को 'सनातन को तोड़ने वाली' करार दिया. उन्होंने दिग्विजय सिंह के पुराने रुख और बयानों को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि यह यात्रा पहले ही एक्सपोज हो चुकी है. मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया उर्फ हर्षानंद गिरि ने भी यात्रा पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राम मंदिर बनने के समय वैसी खुशी और उत्साह दिखाई नहीं दिया, जैसा अब मंदिर के चंदे पर सवाल उठाने में दिख रहा है. हर्षा ने यह सवाल भी उठाया कि चुनाव नजदीक आते ही भगवान राम की याद क्यों आ रही है और अब इंसाफ दिलाने का संकल्प क्यों लिया जा रहा है.
साभार