BJP विधायक ने भरे मंच से डिप्टी CM को घेरा, जनता के सामने की शिकायत, बोलीं- पत्रों का आपने नहीं दिया जबाव

सीधी में बीजेपी विधायक ने अपनी पार्टी के नेता और डिप्टी सीएम को घेर लिया. मंच से विधायक ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग को लिखे गए पत्रों का डिप्टी सीएम की तरफ से कोई जबाव नहीं आया.

Jan 20, 2025 - 20:16
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BJP विधायक ने भरे मंच से डिप्टी CM को घेरा, जनता के सामने की शिकायत, बोलीं- पत्रों का आपने नहीं दिया जबाव

मध्यप्रदेश के सीधी में बीजेपी विधायक रीति पाठक ने भरे मंच पर अपनी पार्टी के सीनियर लीडर और डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल को घेर लिया. रीति पाठक ने मंच से आरोप लगाया कि जिला अस्पताल के विकास के लिए जारी 7 करोड़ रुपए की राशि गायब हो गई, जिससे कई काम होने थे. इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग को 6 से 7 बार पत्र लिखा, लेकिन डिप्टी सीएम की तरफ से कोई जबाव नहीं मिला. 

राजेंद्र शुक्ल डिप्टी सीएम होने के साथ स्वास्थ्य मंत्री भी हैं. 

मंच से लगाया आरोप

दरअसल, सीधी विधायक रीति पाठक रविवार को निजी अस्पताल के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रही थीं. इस दौरान मंच पर राजेंद्र शुक्ल भी मौजूद थे. इस दौरान मंच से विधायक ने स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए. रीति पाठक ने आरोप लगया कि हेल्थ डिपार्टमेंट उनके क्षेत्र की समस्याओं पर ध्यान नहीं देता है. उन्होंने मंच से कहा कि जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर 7 करोड़ की राशि जारी की गई थी. वो राशि गायब हो गई. 

कई बार लिखे पत्र 

विधायक रीति पाठक ने कहा कि 'मैंने यह राशि सबसे पहले विधायक मद से दी थी. इसे लेकर मैं एक साल में 7 बार मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के नाम पर पत्र लिख चुकी हूं. लेकिन, आज तक इस राशि का उपयोग नहीं किया गया है'. 

नहीं दी गई 7.5 करोड़ की राशि

वहीं इस मामले को लेकर विधायक निधि शाखा प्रभारी रविश तिवारी ने बताया कि 2024-25 के वित्तीय वर्ष में ऐसी कोई भी राशि किसी भी विधायक की ओर से नहीं दी गई है. वहीं सांसद निधि के शाखा प्रभारी मानेंद्र तिवारी ने अपने बयान में कहा कि मैं राशि को सार्वजनिक नहीं कर सकता हूं. 

जीतू पटवारी ने साधा निशाना

रीति पाठक का यह वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल साइट एक्स पर लिखा कि विधायक की सुनवाई भी नहीं हो रही है, तो आम नागरिकों की क्या हैसियत होगी? सवाल यह भी है कि उप मुख्यमंत्री जैसे ऐसे कितने नेता हैं, जो सिर्फ अपने जिलों में सीमित हो गए हैं और पूरी ताकत से लोकल पॉलिटिक्स इंजॉय कर रहे हैं? सरकार यह भी तो बताए कि 7 करोड़ कहां गए? यदि एक जिले में ये हाल है, तो 55 जिलों का हिसाब भी दें? लूट का यह 'परिवहन' कब तक, कहां तक?. 

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