Parle-G का रेट नहीं बढ़ा, लेकिन बिस्कुट कम हो गए.... महंगाई में भी मुनाफा! अखिलेश के तंज का बिजनेस एंगल समझिए
लोकसभा में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने Parle-G बिस्कुट से सिर्फ एक चीज सीखी है- महंगाई और मुनाफा. इस सरकार ने 10 साल में DAP की बोरी को, खाद की बोरी को छोटा कर दिया. महंगाई और मुनाफे की तुलना उन्होंने पारले जी से की.
जिसके बिना आपकी शाम की चाय अधूरी हो. बचपन में जिसके बिना दूध का ग्लास गटका नहीं जाता था. बच्चे हो या बुजुर्ग, जब भी बात बिस्कुट की बात होती है, जहन में एक ही नाम याद आता है, पारले जी (Parle G). वही 5 रुपये वाला पारले जी, जो हर दिल में बसता है. अमीर हो या गरीब पारले जी आपको हर घर में मिल जाएगा. लेकिन इन दिनों से पारले जी संसद में शोर मचा रहा है. लोकसभा चुनावों में भी पारले जी को हथियार बनाकर नेताओं ने खूब तालियां बटोरीं. इसके नाम पर सरकार और विपक्ष एक दूसरे को खरी-खोटी सुनाते रहे है. सबसे ज्यादा समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इस बिस्कुट को मशहूर किया. आज भी संसद में अखिलेश यादव ने पारले जी का नाम लेकर सरकार को खरी-खोटी सुनाई. महंगाई को लेकर सरकार पर निशाना साधने के लिए फिर से बिस्कुट का सहारा लिया. समझते हैं कि इस बिस्कुट के बहाने अखिलेश यादव कौन सा पाठ पढ़ाना चाह रहे हैं.
संसद में अखिलेश यादव का पारले जी वाला अटैक
लोकसभा में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने Parle-G बिस्कुट से सिर्फ एक चीज सीखी है- महंगाई और मुनाफा. इस सरकार ने 10 साल में DAP की बोरी को, खाद की बोरी को छोटा कर दिया. महंगाई और मुनाफे की तुलना उन्होंने पारले जी से की.
30 साल में 1 रुपये बढ़ाया दाम
पारले जी की कीमत उसकी सबसे बड़ी ताकत है. कंपनी ने बीते 30 साल में सिर्फ एक बार बिस्कुट की कीमत में सिर्फ एक रुपये की बढ़ोतरी की. साल 2021 में कंपनी ने पारले जी के छोटे पैक की कीमत 4 रुपये से बढ़ाकर 5 रुपये कर दिया. आज भी पारले जी का छोटा पैक 5 रुपये में ही मिलता है. पारले जी ने महंगाई को मात देने के साथ-साथ मुनाफा भी कमाया, लेकिन इसके लिए उन्होंने गजब की तकनीक निकाली.
Parle-G का रेट नहीं बढ़ा, लेकिन बिस्कुट कम हो गए, महंगाई में भी मुनाफा!
पारले जी ने बढ़ती महंगाई को मात देने के लिए बिस्कुट के दाम तो नहीं बढ़ाए, लेकिन उसका वजन जरूर कम कर दिया. पहले पारले जी का छोटे पैक 100 ग्राम का होता था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 92 ग्राम का कर दिया गया. इसके बाद कंपनी ने चुपके से उसका वजन घटाकर 88 ग्राम कर दिया. साल 2021 में बिस्कुट की कीमत 4 रुपये से बढ़ाकर 5 रुपये कर दी और उसका वजन कम कर 55 ग्राम कर दिया गया. यानी 1994 से लेकर अब तक 100 रुपये वाला पारले जी घटकर 55 ग्राम का हो गया. बिस्कुट का वजन 45 फीसदी कम कर दिया गया. कंपनी ने दाम बढ़ाने के बजाए बिस्कुट की कीमत बढ़ा दी.
बिस्कुट के बहाने महंगाई का खेल समझिए
पारले जी ने भारत के लोगों का दिमाग सही से पढ़ा. कमोडिटी के बढ़ते भाव, ब्रांडिंग, पैकेजिंग जैसे कंप्लायंस के बढ़ते खर्च का मुकाबला करने के लिए कंपनी ने दाम बढ़ाने के बजाए बिस्कुट का वजन कम करना शुरू कर दिया. 1994 से लेकर 2021 तक कंपनी ने बिस्कुट के दाम में कोई बढ़ोतरी नहीं की. 30 सालों तक कीमत में कोई इजाफा नहीं हुआ. दाम बढ़ाते तो लोगों को सीधे महंगाई का अहसास होता, इसलिए उन्होंने दाम के बजाए वेट कम करके मुनाफा कमाया. अखिलेश यादव ने पारले जी की इसी स्ट्रेटजी को लेकर सरकार पर तंज कसा. उन्होंने कहा कि खाद की बोरियों के दाम नहीं बढ़ रहे, लेकिन वो छोटी होती जा रही है.
पारले जी का मुनाफा
कंपनी के मुनाफे के लिए दाम बढ़ाने के बजाए वजन कम करने का फैसला किया. जिस कंपनी की नींव 1929 में एक दर्जी ने रखी, आज वो दुनिया की सबसे ज्यादा बिल्कुट बेचने वाली कंपनी बन चुकी है. कंपनी का वैल्यू 17223 करोड़ की हो चुकी है. फोर्ब्स 2022 के आंकड़ों के मुताबिक, विजय चौहान और उनके परिवार का नेटवर्थ 5.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर यानी 45,579 करोड़ रुपये है.
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