कैसे बनते हैं ब्लैक कमांडो, होती है सबसे टफ ट्रेनिंग, जाबांजी का कोई मुकाबला नहीं
देश की सुरक्षा की बात हो, पीएम की सिक्योरिटी हो या कोई खतरनाक ऑपरेशन, दिमाग में एक ही बात आती है ब्लैक कमांडो यानी NSG (National Security Guards) कमांडो.
देश की सुरक्षा की बात हो, पीएम की सिक्योरिटी हो या कोई खतरनाक ऑपरेशन, दिमाग में एक ही बात आती है ब्लैक कमांडो यानी NSG (National Security Guards) कमांडो. ये कमांडो अतुल्य वीर होते हैं. इन्हें आपने सिर से पांव तक काले लिबास में ढके हुआ देखा होगा. ये इतने शूरवीर होते हैं कि मौत को भी मात दे दें. क्या आप भी ब्लैक कमांडो बनने की चाह रखते हैं, तो जानें कैसे बन सकते हैं और ये सफर कितना कठिन होता है.
कैसे बन सकते हैं ब्लैक कमांडो
NSG में सीधी भर्ती नहीं होती है. इसके लिए भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों जैसे CRPF, BSF के सर्वश्रेष्ठ जवानों को चुना जाता है. चयन के समय जवान की शारीरिक और मानसिक शक्ति को परखा जाता है. चयन के बाद शुरू होती है ट्रेनिंग. ये देश की सबसे कठिन ट्रेनिंग में से एक है. कहा जाता है कि ये चयन प्रक्रिया इतनी सख्त होती है कि इसमें 80% से ज्यादा जवान बीच में ही बाहर हो जाते हैं. केवल वही आगे बढ़ पाते हैं, जिनमें अटूट धैर्य और साहस होता है.
कठिन ट्रेनिंग कैसे होती है
90 दिनों की कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है.इसमें बैटल इनोक्यूलेशन यानी असली गोलियों के बीच से गुजरना, मार्क्समैनशिप यानी एक ब्लैक कमांडो की नजर इतनी सटीक हो कि वह पलक झपकते ही दुश्मन के सिर में गोली मार सके, मार्शल आर्ट्स यानी निहत्थे लड़ने में महारत कराया जाता है.इन्हें मानसिक रूप से भी मजबूत बनाया जाता है. कम नींद, कम भोजन और अत्यधिक तनावपूर्ण परिस्थितियों में सही निर्णय लेने में ये सक्षम होते हैं. अंधेरे में लड़ने, हाई-जैकिंग को रोकने, बम निरोधक तकनीकों में एक्सपर्ट बनाया जाता है.
हथियार और तकनीक से लैस
ब्लैक कमांडो दुनिया के सबसे आधुनिक हथियारों का उपयोग करने में सक्षम होते हैं. ये नई तकनीक से वाकिफ होते हैं और उसका पूरा उपयोग करना चाहते हैं. NSG कमांडोज का मोटो होता है— 'सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा'. देश में आतंकवादी हमले जैसे 26/11 मुंबई हमला या अक्षरधाम मंदिर पर हमला, इन ब्लैक कमांडोज ने अपनी जान की बाजी लगाकर देश को सुरक्षित रखा है.
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