जम्मू-कश्मीर: आतंकवाद पर LG मनोज सिन्हा का चाबुक, लश्कर- हिजबुल से जुड़े 5 सरकारी कर्मचारी बर्खास्त
सूत्रों के मुताबिक, आतंकी संगठनों और पाकिस्तान आईएसआई ने सरकारी तंत्र में ऐसे लोगों को प्लांट या था. ये लोग सक्रिय सहयोगी टाइम-बम हैं. उन्होंने पिछले कई दशकों में सरकारी तंत्र को कमजोर करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने का काम किया है.
श्रीनगर:
जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकवादियों को जड़ से उखाड़ फेंकने के अभियान को तेज कर दिया है. इसे लेकर उन्होंने कार्रवाई तेज कर दी है. आतंकवाद से संबंध के शक में एलजी ने मंगलवार को पांच और सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया. अधिकारी के मुताबिक, इस कदम का मकसद‘सरकारी तंत्र के भीतर मौजूद आतंकी तंत्र और उसके बुनियादी ढांचे की जड़ों को निशाना बनाना है.अब तक कुल 85 सरकारी कर्मचारी बर्खास्त किए जा चुके हैं.
अब तक 85 सरकारी कर्मचारी बर्खास्त
अधिकारी ने बताया कि बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में शिक्षक मोहम्मद इशफाक, प्रयोगशाला तकनीशियन तारिक अहमद शाह, सहायक लाइनमैन बशीर अहमद मीर, वन विभाग में वन क्षेत्र कर्मी फारूक अहमद भट और स्वास्थ्य विभाग में ड्राइवर मोहम्मद यूसुफ शामिल हैं.
उपराज्यपाल के प्रशासन ने अब तक ऐसे 85 सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किया है, जिन्हें आतंकवादी समूहों के लिए काम करते पाया गया था. जांच में पता चला कि ये लोग लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों से सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे. सार्वजनिक विश्वास के पदों पर रहते हुए, ये लोग सरकारी खजाने से वेतन ले रहे थे, जबकि गुपचुप तरीके से आतंकी समूहों के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे थे.
बर्खास्त किए गए 5 सरकारी कर्मचारियों के नाम
मोहम्मद इशफाक
तारिक अहमद शाह
बशीर अहमद मीर
फारूक अहमद भट
मोहम्मद यूसुफ
आतंकियों के सहयोगियों पर चला चाबुक
सूत्रों के मुताबिक, आतंकी संगठनों और पाकिस्तान आईएसआई ने सरकारी तंत्र में ऐसे लोगों को प्लांट या था. ये लोग सक्रिय सहयोगी टाइम-बम हैं. उन्होंने पिछले कई दशकों में सरकारी तंत्र को कमजोर करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने का काम किया है.
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहे हैं. पिछले पांच सालों में उन्होंने बड़े-बड़े एक्शन इस मामले में लिए हैं. सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, मनोज सिन्हा ने 2021 में आतंकी तंत्र को बेनकाब करने और उसकी कमर तोड़ने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया था. वित्तपोषकों से लेकर आम कार्यकर्ताओं तक, सभी के खिलाफ उनकी निर्णायक और व्यापक कार्रवाई ने आतंकवादी ढांचे को काफी हद तक ध्वस्त करने का काम किया.
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