मोदी को झुकाया नहीं जा सकता... पुतिन ने यूं ही नहीं अपने दोस्त को सराहा, रिश्ते की बुनियाद पुरानी है
पुतिन और मोदी जब भी मिलते हैं एक अलग ही गर्मजोशी देखने को मिलती है. वैश्विक उथल-पुथल के बीच तमाम देशों के संबंध बने बिगड़े लेकिन भारत और रूस के संबंध लगातार मजबूत होते गए हैं, वह भी तब जब अमेरिका और रूस में तनातनी के चक्कर में भारत के हित दांव पर लगे होते हैं. ऐसे में पुतिन ने कहा है कि मोदी को मजबूर नहीं किया जा सकता.
भारत में पिछले कुछ घंटे से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के एक बयान की काफी चर्चा है. वह मोदी की तारीफ तो पहले भी कर चुके हैं लेकिन इस बार उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री के लिए खुलकर बोला है. पुतिन ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी को देशहित में फैसला लेने से डराया या धमकाया नहीं जा सकता. एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत और रूस के संबंध चौतरफा बढ़ रहे हैं. आगे पुतिन ने जो कहा उसे सुनकर भाजपा नेता और सपोर्टर खुश हो जाएंगे. जी हां पुतिन ने 'मोदी की गारंटी' की बात कर दी. हाल में हुए विधानसभा चुनावों में भी मोदी की गारंटी की काफी चर्चा थी. पुतिन ने कहा कि दोनों देशों के संबंधों की मुख्य गारंटी प्राइम मिनिस्टर मोदी की नीतियां हैं. मेरा साफ मानना है कि मोदी को जबरन देशहित और भारतीयों के खिलाफ फैसला लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है. ऐसा प्रेशर है मैं जानता हूं. कभी-कभी तो मैं भारत के हित में लिए गए उनके फैसले के बारे में जानकर चकित रह जाता हूं. पुतिन 'मेक इन इंडिया' पहल की भी प्रशंसा कर चुके हैं. पुतिन कुछ महीने पहले मोदी को बुद्धिमान व्यक्ति बता चुके हैं. ऐसे में यह सवाल पैदा हो सकता है कि मोदी और पुतिन की दोस्ती कब से हैं. एक राष्ट्राध्यक्ष होने के साथ-साथ उनके बीच कैसी केमिस्ट्री है?
तब वाजपेयी पीएम थे और...
इस दोस्ती को समझने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौर में चलते हैं. वो 2001 का साल था. नवंबर महीने में रूस में वाजपेयी पुतिन से मिल रहे थे. पीछे हाथ बांधे खड़े थे गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी. इसी दौरान एक तस्वीर ली गई जिसकी चर्चा आज भी होती है. पुतिन तब भी राष्ट्रपति थे और आज भी हैं लेकिन पीछे खड़ा वो नेता आज दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश का प्रधानमंत्री है. उस समय वाजपेयी ने पुतिन से मोदी का परिचय कराया था. रूसी राष्ट्रपति को अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि पीछे खड़ा ये शख्स कुछ साल बाद उनके बराबर बैठेगा।
मोदी-पुतिन की केमिस्ट्री
बाद के वर्षों में पुतिन और मोदी की मित्रता बढ़ती गई. रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो दुनिया मोदी की तरफ देखने लगी. यूक्रेन के राष्ट्रपति ने फोन कर मोदी से रूस पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने की अपील की. उधर अमेरिका चाह रहा था कि भारत उसकी हां में हां मिलाए और यूक्रेन संकट के लिए पुतिन को जिम्मेदार ठहराते हुए निंदा करे. हालांकि मोदी ने देशहित को सर्वोपरि रखा. अमेरिकी प्रेशर को नजरअंदाज करते हुए भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदना जारी रखा. इससे रूस की काफी मदद हुई. मोदी ने शांति की बात की। साथ ही पुतिन से फोन पर बात कर वहां फंसे भारतीयों को तिरंगा झंडा लेकर निकलने की खुली छूट दिलाई. मोदी-पुतिन की बातचीत का असर यह हुआ कि यूक्रेन में पाकिस्तानी और दूसरे देश के नागरिक भी तिरंगा हाथों में लेकर सुरक्षित निकल सके.
जैसे भारत और रूस के संबंध समय की कसौटी पर खरे उतरते रहे हैं, वैसे ही मोदी-पुतिन की केमिस्ट्री भी गहरी होती गई. मोदी के बर्थडे पर पुतिन विश करते हैं. वह मोदी को फ्रेंड कहते हुए 'ऑल द बेस्ट' कहते हैं. मोदी के दो कार्यकालों को ही देख लीजिए दुनिया में तमाम संकट और समस्याएं आईं लेकिन इन दोनों नेताओं की दोस्ती मजबूत बनी रही
पुतिन को मोदी पर भरोसा है
यह पुतिन का मोदी पर भरोसा ही है कि अमेरिका और भारत के करीब आने के बाद भी कभी रूसी राष्ट्रपति को ऐसा नहीं लगा कि भारत उससे दूर जा रहा है या उसे किसी तरह की चुनौती मिल सकती है. अमेरिका भले रूस के खिलाफ भारत को उकसाता रहा हो लेकिन रूस ने कभी इस तरह की कोशिश नहीं की. इसकी बजाय दोनों नेता आपसी रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाने की कोशिश में लगे रहे. रक्षा संबंधों के बारे में तो सभी जानते हैं लेकिन उससे आगे स्पेस, तेल और परमाणु ऊर्जा जैसे कई क्षेत्रों को आज संबंध बढ़ रहे हैं. इसकी एक वजह मोदी और पुतिन के बीच बना भरोसा ही है.
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