सिविल जज भर्ती में SC अभ्यर्थियों के लिए 45% न्यूनतम अंक शर्त में ढील पर विचार करें: सुप्रीम कोर्ट ने P&H हाईकोर्ट से कहा
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि वह सिविल जज (जूनियर डिवीजन) भर्ती परीक्षा में अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए 45% न्यूनतम अंकों की शर्त में ढील देने के अनुरोध पर “सहानुभूतिपूर्वक विचार” करे। यह मामला अनुसूचित जाति वर्ग की अभ्यर्थी दीक्षा काल्सन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। उन्होंने कहा कि वह केवल 1.9 अंकों से निर्धारित कट-ऑफ से पीछे रह गईं।
याचिका के अनुसार, काल्सन ने 1100 में से 493.10 अंक प्राप्त किए, जबकि SC श्रेणी के लिए कट-ऑफ 495 अंक था। उन्होंने यह भी बताया कि एक अंग्रेजी प्रश्न के लिए उन्हें शून्य अंक दिए गए, जबकि कई विशेषज्ञों के अनुसार उनका उत्तर सही था। उन्होंने इस संबंध में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) के सचिव और रजिस्ट्रार (भर्ती) को कई अभ्यावेदन दिए और हाईकोर्ट में रिट याचिका भी दायर की। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि परीक्षा में शामिल होने के बाद वह विज्ञापन की शर्तों को चुनौती नहीं दे सकतीं, विशेष रूप से क्लॉज 33, जो उत्तर पुस्तिका के पुनर्मूल्यांकन (re-evaluation) पर रोक लगाता है।
इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली शामिल थे, ने विज्ञापन के क्लॉज 33 में कोई त्रुटि नहीं पाई। हालांकि, जब याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट संजय आर. हेगड़े ने बताया कि SC श्रेणी में 39 पदों में से केवल 9 ही भरे गए हैं और 30 पद अभी भी रिक्त हैं, तो कोर्ट ने याचिकाकर्ता और उनसे ऊपर मेरिट सूची में आने वाले अन्य अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट के समक्ष अभ्यावेदन देने की अनुमति दी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह अभ्यावेदन हाईकोर्ट के प्रशासनिक पक्ष के समक्ष किया जा सकता है, जिसमें SC श्रेणी के लिए निर्धारित 45% न्यूनतम अंकों में ढील देने की मांग की जा सकती है। कोर्ट ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया, “हम हाईकोर्ट से अनुरोध करते हैं कि वह इस अभ्यावेदन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करे, भले ही न्यायिक पक्ष में पहले क्या निर्णय लिया गया हो।” इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अनुमति याचिका (SLP) का निस्तारण कर दिया।
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