CCS Pension Rules | कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक या अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित होने पर ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट

Apr 8, 2026 - 20:01
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CCS Pension Rules | कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक या अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित होने पर ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी नियोक्ता उस कर्मचारी की ग्रेच्युटी का भुगतान रोकने का हकदार है, जिसके खिलाफ कोई न्यायिक या अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने हिमाचल प्रदेश सड़क परिवहन निगम के एक पूर्व क्लर्क द्वारा दायर अपील खारिज की। इस क्लर्क की ग्रेच्युटी परिवहन निगम ने उसके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही के लंबित होने के कारण रोक दी थी।

रिटायरमेंट के बाद अपीलकर्ता की ग्रेच्युटी प्रतिवादी विभाग द्वारा रोक दी गई थी। इसका कारण उसके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही थी, जिसमें उस पर 'कंबाइंड प्री-मेडिकल टेस्ट, 2006' के प्रश्न पत्र लीक करने में कथित रूप से शामिल होने का आरोप था। साथ ही उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही भी चल रही थी। इसी बीच पर्याप्त सबूतों के अभाव में अपीलकर्ता को आपराधिक मामले में बरी कर दिया गया। उसने तर्क दिया कि उसकी ग्रेच्युटी नहीं रोकी जानी चाहिए। उसने दलील दी कि 'केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972' (पेंशन नियम) के नियम 69(1)(c) का उद्देश्य उस स्थिति में ग्रेच्युटी देने से इनकार करना नहीं है, जब कर्मचारी को आपराधिक या अनुशासनात्मक, दोनों में से किसी भी कार्यवाही में बरी कर दिया गया हो।

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रतिवादी के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार किया और ग्रेच्युटी रोकने के फैसले को सही ठहराया। इसके बाद पूर्व कर्मचारी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। विवादित आदेश सही ठहराते हुए जस्टिस मिश्रा द्वारा लिखे गए फैसले में पेंशन नियम के नियम 69(1)(c) का हवाला दिया गया। इसमें कहा गया कि ग्रेच्युटी का भुगतान तब तक रोका जा सकता है, जब तक विभागीय या न्यायिक कार्यवाही पूरी न हो जाए और उन पर अंतिम आदेश जारी न हो जाएं।

नियम 69(c) इस प्रकार है: "सरकारी कर्मचारी को तब तक कोई ग्रेच्युटी नहीं दी जाएगी, जब तक विभागीय या न्यायिक कार्यवाही पूरी न हो जाए और उन पर अंतिम आदेश जारी न हो जाएं: परंतु, जहां 'केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1965' के नियम 16 के तहत विभागीय कार्यवाही शुरू की गई हो—ताकि उक्त नियमों के नियम 11 के खंड (i), (ii) और (iv) में निर्दिष्ट दंडों में से कोई दंड लगाया जा सके—तो सरकारी कर्मचारी को ग्रेच्युटी का भुगतान करने की अनुमति दी जाएगी।"

पेंशन नियमों के नियम 69(1)(c) के बारे में अपीलकर्ता की यह व्याख्या कि इस नियम का अर्थ यह लगाया जाना चाहिए कि किसी भी एक तरह की कार्यवाही पूरी होने पर ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाना चाहिए, अदालत ने खारिज की। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक कोई विभागीय या न्यायिक कार्यवाही लंबित है, तब तक ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं किया जाएगा। पेंशन नियमों के नियम 69(1)(c) के संबंध में अपीलकर्ता की दलील के जवाब में अदालत ने यह टिप्पणी की, “ऐसी दलील इस नियम की प्रकृति को पूरी तरह से गलत समझती है। जैसा कि माननीय सिंगल जज ने पहली बार में ही सही ढंग से कहा था, नियम 69(1)(c) 'रोक' (Embargo) या कानूनी बाधा के रूप में काम करता है, न कि किसी अधिकार देने वाले प्रावधान के रूप में। सामान्य विभाजक शब्द “या” (or) का उपयोग इस रोक के दायरे को बढ़ा देता है, जिससे यह संकेत मिलता है कि जब तक कोई विभागीय या न्यायिक कार्यवाही लंबित है, तब तक ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं किया जाएगा।” अदालत ने आगे कहा, “यदि अपीलकर्ता की व्याख्या स्वीकार की जाती तो कोई कर्मचारी यह तर्क दे सकता था कि उसके खिलाफ किसी भी एक तरह की कार्यवाही पूरी हो जाने के बाद रोक हट जाती है और ग्रेच्युटी जारी कर दी जानी चाहिए। इससे इस प्रावधान का मूल उद्देश्य ही पूरी तरह से विफल हो जाएगा, जिसका उद्देश्य राज्य के वित्तीय हितों की रक्षा करना है।” परिणामस्वरूप, अपील खारिज कर दी गई।

Cause Title: BIKRAM CHAND RANA VERSUS HIMACHAL PRADESH ROAD TRANSPORT CORPORATION

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